अंततः टीकाराम बघेल हुए घंसौर स्थानांतरित

टीबी अस्पताल में बिना किसी काम के वेतन पा रहे थे कर्मचारी नेता!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। मध्य प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष टीकाराम बघेल को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के द्वारा घंसौर स्थानांतरित कर दिया गया है। टीकाराम बघेल की मूल पदस्थापना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छपारा में थी, किन्तु सालों से उन्हें जिला चिकित्सालय के टीबी प्रभाग में संलग्न रखा गया था।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि टीकाराम बघेल मूलतः मलेरिया फील्ड वर्कर के पद पर तैनात थे जिन्हें बाद में पदोन्नत कर रेडियोग्राफर बना दिया गया था। जिला अस्पताल के टीबी प्रभाग में पदस्थ रहते हुए शायद ही कभी टीकाराम बघेल के द्वारा एक्स-रे किये गये हों।

सूत्रों ने कहा कि इसका कारण यह है कि टीबी प्रभाग की एक्स-रे मशीन पूरी तरह बंद है और सालों से धूल खा रही है। वहीं, जिला चिकित्सालय में रेडियोग्राफर्स की कमी के चलते अनेक बार यह माँग किये जाने के बाद कि उनकी सेवाएं अस्पताल में ली जायें, न तो मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी न ही जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक के द्वारा इस पर संज्ञान लिया गया।

इसके साथ ही सूत्रों का कहना है कि अचानक हुए इस आदेश की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रहीं हैं। सूत्रों ने कहा कि लोगों का कहना है कि कर्मचारी हित में लंबे समय से उनके द्वारा किसी तरह के प्रयास नहीं किये गये। जिला चिकित्सालय में सालों से व्याप्त गंदगी, असुरक्षित मेडिकल बायो वेस्ट प्रबंधन आदि के चलते कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर संक्रमण का खतरा मण्डराता रहा किन्तु मध्य प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की जिला ईकाई के द्वारा कभी भी इस मामले में सीएमएचओ या सिविल सर्जन के खिलाफ सुर बुलंद करने के प्रयास तक नहीं किये गये।

चर्चाएं तो यहाँ तक भी हैं कि कर्मचारी नेताओं के द्वारा स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों के द्वारा किये जा रहे नियम विरूद्ध कार्यों और भ्रष्टाचार के मामलों में भी कथित तौर पर आँखंे फेर ली जाती रही हैं। यही कारण है कि तृतीय वर्ग कर्मचारियों का भरोसा धीरे-धीरे कर्मचारी नेताओं पर से उठना आरंभ हो गया था।

चर्चाओं के अनुसार मध्य प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की जिला ईकाई के चुनाव भी सालों से नहीं कराये जाने से कर्मचारी नेता पूरी तरह निरंकुश होने लगे थे। इधर कर्मचारियों के साथ अधिकारियों के द्वारा दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता रहा, उधर कर्मचारी नेता नीरो के मानिंद चैन की बंसी ही बजाते दिखते रहे।

जिला अस्पताल में पदस्थ एक पेरा मेडिकल स्टॉफ ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि जिला चिकित्सालय में पेरा मेडिकल स्टॉफ और चिकित्सक लगातर ही अभद्रता का शिकार होते आये हैं पर संघ के द्वारा इस मामले में किसी तरह का कदम नहीं उठाया गया था।

उक्त कर्मचारी का कहना था कि जिला चिकित्सालय में हाल ही में घटी घटनाओं के संबंध में कर्मचारी संघ के द्वारा अब तक सुरक्षा का ठेका संपादित न करने के लिये मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और सिविल सर्जन को कटघरे मेें खड़ा करने की बजाय सीधे जिला प्रशासन को अल्टीमेटम दिया जाकर जिस तरह से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का परोक्ष तौर पर बचाव करने का कुत्सित प्रयास किया गया, वह किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं माना जा सकता है।

इसके साथ ही उक्त कर्मचारी ने कहा कि पर उपदेश कुशल बहुतेरे की तर्ज पर टीकाराम बघेल द्वारा मरीजों और उनके परिजनों से समन्वय बनाने की नसीहत तो दी गयी पर यह बताने का कभी भी प्रयास नहीं किया गया कि उनके द्वारा सालों से उनकी पदस्थापना वाले स्थान पर कितना और कैसा काम किया गया है?



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