अतिक्रमण मामले में पालिका का मौन!

(शरद खरे)
नगर पालिका परिषद के द्वारा अतिक्रमण के मामले में सुस्त रवैया ही अपनाया जाता रहा है। या ऐसा कहा जाये कि पालिका के द्वारा अतिक्रमण हटाने के नाम पर मुँहदेखी कार्यवाही को अंजाम दिया जाता है तो अतिश्योक्ति नहीं होगा। शहर में जहाँ देखो वहाँ मनमाना अतिक्रमण पसरा हुआ है पर पालिका पूरी तरह निश्ंिचत और मौन ही नजर आ रही है।
पालिका के आग्रह पर जिला दण्डाधिकारी के द्वारा पिछले साल एक अक्टूबर को दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश भी जारी किये जाने के बाद भी पालिका के द्वारा अतिक्रमण हटाने का साहस न किया जाना आश्चर्य जनक ही माना जायेगा। पालिका का अतिक्रमण हटाने के लिये पाबंद अमला भी पूरी तरह खामोश ही नजर आ रहा है।
अतिक्रमण करने वाले कभी बारिश का तो कभी ठण्ड का या कभी गर्मी का हवाला देकर कार्यवाही को रूकवाने की गुहार लगाते हैं। पालिका भी इतनी दयालू है कि वह जरा-जरा सी बातों में पसीज जाती है और अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही को विराम दे देती है। इस तरह तो शहर से अतिक्रमण नहीं ही हट पायेगा और शहर के पुराने अतिक्रमण नियमित की श्रेणी में आते जायेंगे।
पिछले साल तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को खुद ही अतिक्रमण हटाने के लिये सड़कों पर उतरना पड़ा। अगर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को ही अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही को अंजाम देना था तो फिर पालिका के द्वारा जिला कलेक्टर से धारा 144 के तहत अधिकार लेने की आवश्यकता ही क्या थी?
देखा जाये तो अधिकांश अतिक्रमण रसूखदारों के ही हैं। रसूखदारों के द्वारा जहाँ खाली जगह दिखी वहीं अस्थायी निर्माण कर लिया जाता है उसके बाद पालिका की कथित अनदेखी के चलते यह अस्थायी अतिक्रमण स्थायी में तब्दील हो जाता है। इस तरह सरकारी भूमि की बंदरबांट जारी है। पालिका के पास अतिक्रमण हटाने के लिये पर्याप्त संसाधन हैं। इसके अलावा हाल ही में जिला कलेक्टर के द्वारा उन्हें अतिरिक्त अधिकार भी प्रदाय कर दिये गये हैं तब पालिका को अतिक्रमण हटाने में अब किसी तरह की दिक्कत आना नहीं चाहिये। इसके बाद भी अगर पालिका अतिक्रमण हटाने की दिशा में कार्यवाही नहीं करती है तो यह जानबूझकर की गयी अनदेखी ही माना जा सकता है।
अतिक्रमण के मामले में सांसद-विधायकों का मौन भी आश्चर्यजनक ही माना जायेगा। मॉडल रोड के निर्माण का कार्य पूर्ण न होने के पीछे अतिक्रमण न हटाना ही सबसे बड़ी बाधा के रूप में सामने आ रहा है। इसके अलावा एसपी बंग्ले से अपर बैनगंगा मार्ग में भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया है।
कुल मिलाकर यह कहा जाये कि पालिका के द्वारा जो भी किया जा रहा है वह अपनी सुविधा के अनुसार ही किया जा रहा है न कि जनता की सुविधाओं को ध्यान में रखकर! एक बार फिर ठण्ड का आगाज हो चुका है। अब अगर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही को अंजाम दिया जाता है तो अतिक्रमणकर्ताओं के द्वारा कुछ लोगों को ठण्ड का हवाला देकर इसको ठण्ड के बाद अंजाम देने के लिए उकसाया जा सकता है। अब सब कुछ नवागत नगर पालिका अधिकारी नवनीत पाण्डेय पर ही निर्भर है कि वे शहर को सुंदर बनाने की कवायद को कहाँ से आरंभ करते हैं।



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