अब आगे की लड़ाई

नेपाल में लोगों का ध्यान ज्यादातर स्थानीय सरकारों और अब राज्य विधानसभा के निर्वाचित प्रतिनिधियों पर रहा है, जबकि राज्यों के संपूर्ण ढांचे के लिए तमाम स्तरों पर जरूरी नौकरशाहों के प्रति वे उतने ही उदासीन रहे हैं। लेकिन इस मुद्दे पर काफी गंभीरता से गौर करने की जरूरत है।

सरकार ने हाल ही में एक आकलन किया था कि सभी सातों राज्यों में कम से कम 3,000 नौकरशाहों को फौरन नियुक्त करने की दरकार है। बल्कि नौकरशाहों की संख्या तो इस गंभीर समस्या का ऊपरी सिरा भर है। राज्य सरकारों के सही से काम करने के लिए कई तरह के प्रयास करने पड़ेंगे। इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास भी शामिल है, ताकि नौकरशाही अपना काम शुरू कर सके। इसके अलावा, ऐसे कायदे बनाने होंगे, कानून पारित करने होंगे, जिनसे संघीय ढांचा काम कर सके।

इसमें कोई संदेह नहीं कि इस ढांचे को जमीनी स्तर पर खड़ा करने की राह में तमाम दुश्वारियां आएंगी, जिनकी कुछ झलकियां तो स्थानीय निकायों में मिलने भी लगी हैं। कुछ समस्याएं तो आसानी से पहचानी जा सकती हैंः अनेक नौकरशाह काठमांडू जैसे बड़े शहरों की सुख-सुविधाओं के बीच जीने के अभ्यस्त हो चुके हैं, वे इस बात से चिढ़े बैठे हैं कि उन्हें अब जिलों में भेजा जाएगा।

एक बार जब वे जिलों में पहुंचेंगे, तो उन्हें बुनियादी ढांचे की कमी और वैधानिक अस्पष्टता से जूझना पड़ेगा। फिर नवनिर्वाचित स्थानीय जन-प्रतिनिधियों और नौकरशाहों के रिश्ते काफी उलझन भरे होंगे। निर्वाचित जन-प्रतिनिधि मानते हैं कि उनके इलाके की महत्वाकांक्षी योजनाओं का प्रभारी उन्हें बनाया जाना चाहिए। हालांकि उन्हें कायदों और कानूनों की मुकम्मल जानकारी नहीं है और वे नहीं जानते कि अपना एजेंडा कैसे लागू करें?

दूसरी तरफ, नौकरशाह महसूस करते हैं कि निर्वाचित जन-प्रतिनिधि इससे अनभिज्ञ हैं कि सिस्टम कैसे काम करता है। कई मामलों में दोनों के मतभेद पहले ही खुलकर सामने आने लगे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि यह शीशे की तरह साफ है कि संघीय ढांचा नौकरशाही और निर्वाचित प्रतिनिधियों में बेहतर समन्वय के बिना काम ही नहीं कर सकता। (द काठमांडू पोस्ट, नेपाल से साभार)

(साई फीचर्स)



0 Views.

Related News

2018 में अपने पहले ट्वीट से ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को सीधा और सख्त संदेश दिया और निशाना.
देश में बोतलबंद पानी पर बांग्लादेश एग्रीकल्चर रिसर्च कौंसिल (बार्क) के शोध निष्कर्ष भयावह हैं। ढाका के 24 स्थानों से.
यह हमारे जाबांज महिलाओं-पुरुषों, शिक्षाविदों, पत्रकारों, लेखकों, डॉक्टरों सहित उन तमाम लोगों को याद करने का वक्त है, जिन्हें बांग्लादेश.
सीआईए के निदेशक माइक पोम्पियो की बात सीधी और साफ है। पाकिस्तान अपनी सीमा के भीतर आतंकियों के आश्रयस्थल खत्म.
हम बांग्लादेश की सरजमीं पर पोप फ्रांसिस का दिल से स्वागत करते हैं। पोप फ्रांसिस तीन रोजा दौरे पर इन.
अमेरिका ने डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) पर नए प्रतिबंध थोपकर चीन की तीन कंपनियों को भी प्रतिबंधित कर.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *