अवैध शराब पर स्वीकारोक्ति . . .

(लिमटी खरे)

भारतीय जनता पार्टी की जिला अध्यक्ष रहीं श्रीमति नीता पटेरिया के द्वारा जिले में अवैध शराब बिकने की बात को लेकर जिला कलेक्टर को एक पत्र लिखा गया है। श्रीमति पटेरिया प्रदेश में डेढ़ दशक से ज्यादा राज करने वाले सत्ताधारी दल भाजपा की सदस्य हैं। इस लिहाज से उनकी बात पर विचार किया जाना चाहिये।

श्रीमति नीता पटेरिया पूर्व सांसद और पूर्व विधायक भी रहीं हैं। उनकी बात को सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता है। श्रीमति पटेरिया के बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा के द्वारा भी कमोबेश इसी तरह के आशय की विज्ञप्ति जारी की गयी है। इससे जाहिर होता है कि अखबारों में अवैध शराब के बारे में महीनों से जो खबरें प्रकाशित हो रहीं थीं, वे गलत नहीं थीं।

यक्ष प्रश्न यही खड़ा है कि आखिर आबकारी विभाग क्या कर रहा है? क्या आबकारी विभाग के पास अवैध शराब को बिकने से रोकने से इतर और कोई काम है! जाहिर है आबकारी विभाग का काम शराब से ही संबंधित है, फिर क्या कारण है कि आबकारी विभाग अपने कर्त्तव्यों का पालन ईमानदारी से नहीं कर पा रहा है।

कहने को आबकारी विभाग के द्वारा कभी कभार छापामार कार्यवाही को अंजाम देकर लहान आदि नष्ट किया जाता है। अवैध शराब पकड़ने की खबरें तो पुलिस विभाग की कार्यवाहियों के बाद ही सुर्खियों में आती हैं। गाँव-गाँव में अवैध शराब का कारोबार बुरी तरह फैल चुका है।

शराब को सामाजिक बुराई माना जाता है। यह भी सच है कि इससे अर्जित राजस्व से सरकारी कोष में जमकर बढ़ोत्तरी होती है। शराब दुकानों का ठेका लेने वाले भले ही घाटा होने का स्वांग रचें किन्तु सालों से शराब कारोबार से जुड़े लोग अभी भी शराब व्यवसाय में जुड़े हैं जो इस बात का द्योतक माना जा सकता है कि शराब से उन्हें घाटा तो कतई नहीं हो रहा है।

कहते हैं शराब के व्यवसाय में जितना मुनाफा है उतना मुनाफा शायद ही किसी अन्य व्यवसाय में हो। खरीददार के द्वारा किसी अन्य दुकान पर जाकर भावताव किया जाता है पर शराब के ठेके पर गद्दीदार के द्वारा शराब की बोतल की जो कीमत बोल दी जाती है शराब के शौकीन बिना जद्दोजहद के उतनी कीमत अदा कर उसे खरीद लेता है।

जिले भर के होटल ढाबों में शाम ढलते ही जिस तरह की महफिलें जमती हैं वह न तो आबकारी विभाग से छुपी हैं और न ही पुलिस विभाग से। इसके बाद भी आबकारी विभाग के द्वारा छापामार कार्यवाही न किया जाना अनेक संदेहों को जन्म देता है। याद नहीं पड़ता कि आबकारी विभाग के द्वारा लंबे समय से होटल-ढाबों का औचक निरीक्षण कर अवैध शराबखोरी के खिलाफ कोई अभियान छेड़ा गया हो।

आबकारी के नियमों के हिसाब से शराब बेचने, शराब परोसने आदि के लिये अलग-अलग तरह की अनुज्ञाएं (लाईसेंस) प्रदाय किये जाते हैं। यहाँ तक कि अगर किसी के घर कोई कार्यक्रम है और वह अपने घर पर कार्यक्रम में शराब परोसना चाहता है तो उसके लिये भी एक दिन के लाईसेंस की व्यवस्था है।

होटल-ढाबों में जिस तरह से बिना लाईसेंस शराब बिक रही है वह किस ओर इशारा कर रही है? गाँव-गाँव खुलेआम पेकर्स, कूचिए (अवैश शराब बेचने वालों के लिये शराब लॉबी में प्रयुक्त शब्द) के द्वारा शराब बेची जा रही है। युवा पीढ़ी इस नशे की गुलाम होती जा रही है।

आज शाम ढलते ही युवाओं को शराब के नशे में झूमते हुए देखा जा सकता है। शराब के नशे में अपराध भी ज्यादा घटित हो जाते हैं इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। शराब पर अंकुश लगाये जाने की महती जरूरत महसूस की जा रही है।

भारतीय जनता पार्टी की जिला अध्यक्ष रहीं श्रीमति नीता पटेरिया के द्वारा भाजपा के शासनकाल में ही अवैध रूप से शराब बेचे जाने की बात उठाये जाने का स्वागत किया जाना चाहिये। उनके द्वारा प्रदेश सरकार, प्रभारी मंत्री सहित स्थानीय सांसद बोध ंिसंह भगत, फग्गन सिंह कुलस्ते एवं चारों विधायक दिनेश राय, कमल मर्सकोले, रजनीश हरवंश सिंह एवं योगेंद्र सिंह को आईना ही दिखाया गया है कि उन्हें जो काम करना चाहिये वह काम पूर्व सांसद एवं पूर्व विधायक के द्वारा किया जा रहा है।

श्रीमति नीता पटेरिया सांसद और विधायक के साथ ही साथ जिला भाजपा की अध्यक्ष रहीं हैं। अगर उन्होंने यह बात उठायी है तो जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें यह भी पता होगा कि उनके सांसद या विधायक रहते हुए भी अवैध रूप से शराब जमकर बिकती आयी है। रातों-रात तो अवैध रूप से शराब बेचने का क्रम आरंभ नहीं ही हुआ होगा। अगर सांसद या विधायक रहते उनके द्वारा अवैध शराब की रोकथाम की दिशा मंे पहल की जाती तो आज जिले की तस्वीर कुछ और हो सकती थी।

कुछ साल पहले सिवनी के निर्दलीय विधायक दिनेश राय के द्वारा अवैध शराब का मामला उठाया गया था, किन्तु उसके बाद जिले के चारों विधायक और दोनों सांसद इस मामले में पूरी तरह मौन हो गये। जिला मुख्यालय में अण्डे के ठेलों के आसपास शाम ढलते ही लगने वाली भीड़ क्या अण्डे खाने के लिये जुटती है!

शराब दुकानों में किस तरह की शराब बिक रही है इसकी जाँच भी आवश्यक है। जिले में किस ब्रांड की शराब की ज्यादा खपत है और वेयर हाऊस से वह किस तादाद में निकल रही है इसकी पतासाजी भी की जाना चाहिये। श्रीमति नीता पटेरिया के पत्र के बाद जिला प्रशासन अगर अपने खुफिया तंत्र के जरिये इस बात की तसदीक करवाये कि शहर में अवैध रूप से शराब बिक रही है या पी अथवा पिलायी जा रही है तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है। उम्मीद की जानी चाहिये कि श्रीमति नीता पटेरिया के पत्र के बाद अवैध शराब के मामले में प्रशासन संज्ञान लेगा!



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