अस्पताल में तैनाती को लेकर निश्चिंत हैं सीएस!

कमजोर नस आ चुकी है डॉ.श्रीवास्तव के हाथ!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रहे वर्तमान सिविल सर्जन डॉ.राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव इस बारे में निश्चिंत हैं कि उनकी तैनाती हर हाल में जिला चिकित्सालय सिवनी में हो ही जायेगी। संभवतः यही कारण है कि वे अपनी पदस्थापना के लिये अब ज्यादा प्रयास नहीं कर रहे हैं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि एक निजि पार्टी के दौरान तत्कालीन जिला कलेक्टर धनराजू एस. की सर्जिकल स्ट्राईक करके देश – प्रदेश में इस पार्टी, सिवनी और खुद को चर्चाओं में लाने वाले डॉ.आर.के. श्रीवास्तव अब बेफिक्र नजर आ रहे हैं कि उनकी पदस्थापना अब सिवनी जिले में होने से कोई रोक नहीं सकता है।

सूत्रों ने कहा कि लगभग डेढ़ दशकों से मरीजों को देखने की बजाय प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अगले साल सेवा निवृत्त होने वाले हैं। यही कारण है कि उनके द्वारा अब भोपाल के चक्कर लगाने की बजाय जिले के एक अधिकारी को साधकर अपनी पदस्थापना सिवनी कराये जाने का ताना-बाना बुना जा रहा है।

इसके साथ ही सूत्रों ने कहा कि जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड के द्वारा जिला चिकित्सालय की अव्यवस्थाओं के चलते तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ.पुष्पा तेकाम को हटाकर उनका प्रभार उस समय के प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव को दे दिया गया था।

सूत्रों ने कहा कि जिले के चिकित्सक उस समय हैरान थे कि जिले में स्वास्थ्य विभाग के मुखिया डॉ.आर.के. श्रीवास्तव आखिर किस तरह स्वास्थ्य विभाग के दूसरे मुखिया नये सीएमएचओ डॉ.के.सी. मेश्राम के अधीन काम कर पायेंगे। स्वास्थ्य विभाग के अंदरखाने से छन-छन कर बाहर आ रहीं चर्चाओं पर अगर यकीन किया जाये तो जिस पद के लिये भारी चढ़ौत्तरी चढ़ाना होता है वह बिना किसी मेहनत के ही उनकी झोली में आ गिरा है।

इसी तरह सूत्रों ने कहा कि डॉ.पुष्पा तेकाम को सीएस पद से हटाये जाने के विरोध में जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड के खिलाफ वे राजस्व आयुक्त के कार्यालय में अपील के लिये चलीं गयीं हैं। सूत्रों की मानें तो इस मामले में वे माननीय उच्च न्यायालय की शरण में भी जा सकतीं हैं।

सूत्रों ने कहा कि अब जबकि डॉ.आर.के. श्रीवास्तव की पदस्थापना वर्तमान में सिवनी जिले में है ही नहीं तो उन्हें किस आधार पर सिविल सर्जन का प्रभार दिया गया है, इस बात को अगर चुनौति दी जाये तो यह मामला उनके एवं प्रशासन के खिलाफ जा सकता है।

उधर, सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इसी कमजोर नस को संभवतः डॉ.राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव द्वारा भांप लिया गया है और उनके द्वारा मौन साध लिया गया है कि अब प्रशासन के द्वारा इस मामले में किसी भी तरह डॉ.आर.के. श्रीवास्तव की तैनाती जिले में कराने का प्रयास किया जायेगा।



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