आदिवासी की जमीन का खनिज उसका होगा!

कितनी संवैधानिक हैं पारंपरिक ग्राम सभाएं . . . 03

जिले में आदिवासियों को भरमाने का सिलसिला है जारी!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। पाँचवी अनुसूचि की व्याख्या अपने हिसाब से की जाकर कुछ शरारती तत्वों के द्वारा सिवनी जिले के आदिवासियों को जमकर भरमाया जा रहा है। पाँचवी अनुसूचि के बारे में तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की बातें भी प्रकाश में आ रही हैं।

घंसौर पुलिस के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस आशय के कुछ संदेश भी सोशल मीडिया व्हाट्सएप पर चल रहे हैं। इन संदेशों में कहा जा रहा है कि पाँचवी अनुसूचि में आदिवासियों को सबसे बडा अधिकार दिया गया है। वह ये है कि आदिवासी समाज के बिना अनुमति के कलेक्टर हो या प्रधानमंत्री तथा गैर आदिवासी इसके तहत अनुसूचित क्षेत्र में बिना आदिवासियों के मर्जी से क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकता है।

सूत्रों ने बताया कि इन संदेशांे में यह भी कहा जा रहा है कि पाँचवीं अनुसूचि के अनुसार किसी भी प्रकार का वाद विवाद (झगड़े) या जमीन संबंधी विवाद के लिये पुलिस या न्यायालय में जाने की जरूरत नहीं है। ये सब विवाद, आदिवासी समाज के लोगों द्वारा आपस में मिलकर विवादों का समाधान, निपटारा कर सकते हैं।

इसके साथ ही सूत्रों ने बताया कि इस तरह के संदेशों में यह भी कहा जा रहा है कि पाँचवीं अनुसूचि में गरीब से अमीर बनने का अधिकार दिया गया है। इसके तहत उदाहरण देते हुए कहा गया है कि जैसे आदिवासी की जमीन के अंदर जो भी खनिज पदार्थ, लोहा, अयस्क, सोना, चाँदी आदि का मालिक सिर्फ आदिवासी समाज होगा।

सूत्रों ने आगे बताया कि इस तरह के संदेशों में कहा जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिये गये आदेश के अनुसार जिसकी जमीन है उसकी जमीन में से निकलने वाले खनिज पदार्थों का मालिकाना हक उसका रहेगा। इसलिये आपको (आदिवासियों को) गरीब से अमीर तो आपको किसी सरकार से भीख माँगने की जरूरत नहीं।

इसी तरह सूत्रों ने आगे बताया कि इस तरह के संदेशों में कहा जा रहा है कि अनुसूचित क्षेत्र में बहने वाली नदियों, जंगल, तालाब आदि पर अधिकार आदिवासियों का होना चाहिये। संदेशों में यह भी कहा जा रहा है कि ये अधिकार आदिवासियों को संविधान के द्वारा दिये गये हैं, पर इन्हें आज तक लागू नहीं किया गया है।

सूत्रों ने आगे बताया कि इस तरह के संदेशों में कहा जा रहा है कि देश का संविधान नहीं मानने पर देशद्रोही का मुकदमा दर्ज किया जाता है, पर संविधान के अनुच्छेद 244(1) को नहीं मानने पर कौन सा मुकदमा दर्ज होगा? संदेशों में यह भी कहा जा रहा है कि इस तरह के संदेशों को एक दूसरे पाँचवी अनुसूचि में आदिवासियों को क्या अधिकार दिये गये हैं, यह बताने की कोशिश की जा रही है . . .!



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