इंदौर बस हादसे के बाद भी नहीं जागा प्रशासन

अब तक महज रस्म अदायगी के लिये भी जारी नहीं हुई एडवाईजरी!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में बीते शुक्रवार को हुए बस हादसे के बाद भी सिवनी में पुलिस और परिवहन विभाग की तंद्रा नहीं टूट पायी है। सिवनी में रस्म अदायगी के लिये ही सही पर शालेय परिवहन में लगे वाहनों के लिये किसी तरह की एडवाईजरी भी जारी नहीं की गयी है।

भोपाल से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया ब्यूरो से सोनल सूर्यवंशी ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सूत्रों के हवाले से बताया कि इंदौर में हुए हादसे के बाद भोपाल पुलिस ने शालेय परिवहन में लगे वाहनों के लिये एडवाईजरी जारी कर दी है। एडवाईजरी में कहा गया है कि बार-बार लापरवाही किये जाने पर क्रिमनल केस दर्ज किया जायेगा।

सूत्रों ने बताया कि शालेय परिवहन में लगे वाहनों के लिये दिये गये दिशा निर्देशों में कहा गया है कि पुलिस के द्वारा समय – समय पर औचक निरीक्षण कर यह देखा जायेगा कि परिवहन में लगे वाहनों में बच्चों की संख्या निर्धारित से ज्यादा तो नहीं है। इसके अलावा छोटे बच्चों को सावधानी से चढ़ाया और उतारा जा रहा है कि नहीं।

इसके साथ ही सूत्रों ने बताया कि इस एडवाईजरी में यह भी कहा गया है कि शालेय परिवहन में लगे वाहनों में जीपीएस और सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य है। इसके साथ ही साथ परिवहन के लिये प्रयोग होने वाले वाहनों में स्पीड गर्वनर भी होना आवश्यक है। शालेय परिवहन करने वाले चालक के पास पर्याप्त अनुभव होना भी आवश्यक है।

सूत्रों ने आगे बताया कि शालाओं को निर्देश दिये गये हैं कि जिस वाहन में छात्राएं आती – जाती हैं उन वाहनों में महिला परिचारक का होना अनिवार्य है। विद्यार्थी घर तक सकुशल पहुँचें, इसकी ट्रेकिंग होना भी अनिवार्य किया गया है।

ज्ञातव्य है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा दिये गये दिशा निर्देशों के अनुसार शालेय परिवहन में लगे वाहनों के आगे और पार्श्व हिस्से में शाला का नाम और स्कूल बस व स्कूल ड्यूटी एवं फोन नंबर लिखा होना अनिवार्य है। इन वाहनों को चलाने वाले चालकों के पास पाँच साल का अनुभव होना आवश्यक है।

दिशा निर्देशों के अनुसार शालेय परिवहन में लगे वाहनों के अंदर प्राथमिकोपचार (फर्स्ट एड) बॉक्स होना आवश्य है। खिड़की के काँच के बाहर ग्रिल लगी होना आवश्यक है। इन वाहनों में आग बुझाने के यंत्र (फायर एक्सटेंविशर) होना आवश्यक है। इतना ही नहीं इन वाहनों में शाला का एक सहायक भी होना चाहिये। बस के सड़क पर चलने के दौरान वाहन के दरवाजे बंद होना चाहिये।

यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि सिवनी जिले में शालेय परिवहन में लगी बस, ऑटो, छोटा हाथी आदि वाहनों की जाँच सालों से नहीं की गयी है। इन वाहनों में न तो स्पीड गर्वनर लगे हैं और न ही सीसीटीवी कैमरे ही इनमें दिखते हैं। और तो और जिन वाहनों में छात्राएं आना – जाना करतीं हैं, उन वाहनों में महिला परिचारिका भी नहीं होती है।

इंदौर में हुए हादसे के बाद सिवनी में प्रशासनिक स्तर पर न तो सरकारी और निजि शालाओं की कोई बैठक ही आयोजित की जाकर शालेय परिवहन के लिये दिशा निर्देशों के बारे में बताया गया है और न ही शालेय परिवहन में लगे वाहनों की जाँच ही समय – समय पर की जा रही है। अपेक्षा व्यक्त की जा रही है कि जिले भर में शालेय परिवहन में लगे वाहनों के बारे में स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किये जायें ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा पर सवालिया निशान न लग सकें।



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