इशाक डार से आगे

ऐसे समय में, जब वित्त मंत्री इशाक डार को नवाज शरीफ के साथ-साथ कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, यह स्वाभाविक है कि वाले दिनों में उन्हें मुश्किल सवालों से टकराना पडे़गा। हालांकि इधर उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन यह निष्कर्ष गलत न होगा कि वह राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो की कार्रवाई को राजनीति प्रेरित और बदले का मामला कहें। मरियम नवाज के इस मामले को इसी रूप में देखने के बाद कोई कारण नहीं है कि डार उनकी बात से नाइत्तफाकी रखें।

राजनीतिक घटनाक्रम कुछ भी हो, एक बात साफ है कि इशाक डार को अब वित्त मंत्री पद तो छोड़ना ही होगा। महज इसलिए नहीं कि वह कानूनी दांव-पेच में उलझे हैं, बल्कि ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उनमें यह स्वीकार करने की क्षमता है कि देश की अर्थव्यवस्था निचले स्तर पर है और तत्काल सुधार न हुआ, तो देश जल्द ही बडे़ आर्थिक संकट में फंस जाएगा। डार आर्थिक मोर्चे पर खुद को सफल मानते हैं।

कुछ मामलों में वे सफल रहे भी हैं, मगर आर्थिक मोर्चे पर सब कुछ उतना उजला भी नहीं है। सच यही है कि पाकिस्तान को तत्काल एक ऐसे भविष्योन्मुखी वित्त मंत्री की जरूरत है, जो उसकी अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने का काम करे। बीते चार वर्षों में अर्थव्यवस्था में दिखा बदलाव अब अलग-अलग मोर्चों पर उतार पर है। चालू खाते का घाटा बढ़ता गया है, मुद्रा भंडारण में गिरावट आई है। अर्थव्यवस्था बिगाड़ने वाली संरचनात्मक बाधाएं दूर नहीं की गईं। अब समय वास्तविकता को समझने और उसके अनुकूल आचरण करने का है।

देश को अब एक ऐसे वित्त मंत्री की जरूरत है, जो अपने बचे हुए छोटे से कार्यकाल में भी अर्थव्यवस्था के नीचे जाने के कारणों की पहचान करके इसे गति देने वाली दीर्घावधि की कार्ययोजना दे सके। संक्षेप में, देश को एक ऐसा वित्त मंत्री चाहिए, जो नीतिगत बाध्यताओं के साथ चलते हुए, धीरे-धीरे आर्थिक समायोजन की दिशा में आगे बढ़े। जरूरत हो, तो कुछ दिनों के लिए विकास की कीमत पर भी। अब यह तय हो चुका है कि कम से कम डार तो वह इंसान नहीं ही हैं। सो, उन्हें अब अपना पद छोड़ ही देना चाहिए। (द डॉन पाकिस्ताडन से साभार)

(साई फीचर्स)



0 Views

Related News

उन तमाम मसलों पर चीन और अमेरिका की राय एक-दूसरे के उलट होती है, जो अक्सर काफी चर्चा में होते.
क्षेत्रीय संसद द्वारा अपनी आजादी पर मुहर लगाने के साथ ही कैटेलोनिया जश्न में डूबा ही था कि स्पेन की.
भारत में निवेश को बढ़ावा देने वाले जरूरी नीतिगत ढांचे और दिशा-निर्देशों पर चर्चा करने के लिए अक्तूबर के आखिरी.
चार महीने के संघर्ष के बाद पिछले हफ्ते अमेरिकी फौज को रक्का में मिली जीत एक बड़ा प्रतीकात्मक महत्व रखती.
अगर डोनाल्ड ट्रंप यह सोचते हैं कि राष्ट्रपति पद का इस्तेमाल निजी हित में करने में कोई गलती नहीं है,.
बांग्लादेश में अक्षय स्रोत से बिजली उत्पादन बढ़ाने की दिशा में अत्यंत धीमी प्रगति न सिर्फ इसलिए चिंताजनक है कि.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *