उद्योगों को मिली छूट होगी खत्म

प्रदेश सरकार को उठाना होगा बोझ

(विजय सिंह राजपूत)

इंदौर (साई)। व्यापारी भले ही जीएसटी के नाम से डर रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों को इससे खासी उम्मीदें हैं। इनके मुताबिक, नये कानून से अर्थव्यवस्था की विकास दर बढ़ेगी और मुद्रा स्फीति कम होगी। सरकार को मिलने वाला कर तो बढ़ेगा ही, साथ ही व्यापारी और उपभोक्ता को भी लाभ मिलेगा।

जीएसटी कॉन्क्लेव में गत दिवस संपन्न हुए एक हजार सीए, कर सलाहकार और व्यापार प्रतिनिधियों को जीएसटी से परिचित कराते हुए देशभर के विशेषज्ञों ने यह राय रखी। टैक्स प्रेक्टिशनर्स एसोसिएशन (टीपीए) इंदौर की ओर से आयोजित जीएसटी कॉन्क्लेव लाभ मंडपम् (अभय प्रशाल) में हुआ।

जीएसटी कानून के प्रावधान तय करने में अहम भूमिका निभाने वाले दिल्ली के जीएसटी कमिश्नर उपेंद्र गुप्ता ने कहा कि देशभर से आये सुझावों को इसमें शामिल किया गया है, ताकि कानून बेहतर बन सके। उन्होंने कहा कि हमने कभी सोचा नहीं था कि नया कर कानून वित्त वर्ष के बीच से लागू होगा, लेकिन अब ऐसा हो रहा है। पहले जिस वस्तु पर जितना कर लगता था। नये कानून में भी लगभग उतना ही लगेगा।

उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश सरकार उद्योगपतियों को अपने यहां उद्योग लगाने के लिये प्रवेश कर, वैट आदि में कोई छूट दे रही है तो वह जीएसटी में स्वतः समाप्त हो जायेगी, क्योंकि ये सभी कर भी खत्म हो रहे हैं। अब यदि प्रदेश सरकार को ऐसी छूट जारी रखना है तो प्रदेश को उस छूट का भार खुद वहन करना होगा। दरअसल, भारत सरकार प्रदेश को जीएसटी का 58 फीसदी हिस्सा प्रदान करेगी। प्रदेश चाहे तो उसमें से छूट बरकरार रख सकता है।

कॉन्क्लेव में मुख्य वक्ता और अप्रत्यक्ष कर विशेषज्ञ के तौर पर मौजूद सुप्रीम कोर्ट के वकील वी.लक्ष्मी कुमार ने कहा कि अभी तक अन्य राज्यों में चुकाये गये कर का व सेंट्रल एक्साईज का क्रेडिट आम व्यापारी को नहीं मिलता था। जीएसटी में यह मिलने लगेगा। साथ ही राज्य के अलग-अलग कर समाप्त हो जायेंगे। इससे उत्पादों व सेवाओं की कीमतों में कमी आयेगी। जीएसटी में सारा काम ऑनलाईन होगा।

व्यापारी, सलाहकारों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाना होंगे। भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा। जीएसटी में पांच तरह की टैक्स दरें रखी गयी हैं, क्योंकि एक ही दर रखना संभव नहीं था, अन्यथा गरीब व अमीर पर समान बोझ आता। जीएसटी में आम व गरीब व्यक्तियों के उपयोग की वस्तुओं पर शून्य व 05 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है, जबकि अमीरों के उपयोग की वस्तुओं पर 28 प्रतिशत।

कॉन्क्लेव में जयपुर के सीए संजय अग्रवाल ने कहा कि जिन करदाताओं का टर्नओवर 50 लाख तक है, वे जीएसटी में बिना बही-खाता मेंटेन किये कंपोजिशन का लाभ लेते हुए टैक्स भर सकेंगे। चेक पोस्ट खत्म होने से माल परिवहन की गति बढ़ेगी।

सुप्रीम कोर्ट के वकील मुकुल गुप्ता ने कहा कि जीएसटी आने से रुपया तो मजबूत होगा ही, इसमें माल या सेवा की वास्तविक कीमत पर ही टैक्स लगेगा। जीएसटी कर सलाहकारों के मौके भी बढ़ा रहा है। उदयपुर से आये सीए केशव मालू ने भी जानकारी दी। इस मौके पर टैक्स प्रेक्टिशनर्स एसोसिएशन की मेंबर्स डायरी का विमोचन भी किया गया। इस मौके पर सीए अभय शर्मा, राजेश मेहता, कर सलाहकार आर.एस. गोयल व राजेश समेत तमाम एक्सपर्ट उपस्थित थे।



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