एक वो पाण्डेय, एक ये पाण्डेय!

(लिमटी खरे)

लगभग ढाई दशकों से सिवनी जिले में जो कुछ चल रहा है उससे यही प्रतीत हो रहा है कि जिले को दूरदर्शी एवं कड़क प्रशासकों की आवश्यकता है। 2015 में जिला उन्माद की आग में झुलसा। बरघाट, साल्हे, बोरी और सिवनी सहित कुछ अन्य स्थानों पर आताताईयों के द्वारा सौहाद्र और शांति व्यवस्था को तार तार करने का प्रयास किया गया। लोग हैरान थे कि कल तक आपस में एक दूसरे के दुख सुख में कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले आखिर इस तरह की घटनाओं को कैसे अंजाम दे सकते हैं?

यह सब कुछ राजेश्वर प्रसाद सिंह के पुलिस अधीक्षक रहते हुआ। इसके बाद सिवनी में अवध किशोर पाण्डेय की तैनाती हुई। ए.के. पाण्डेय के आने के बाद पुलिस ने जिस तरह से इन सारी अव्यवस्थाओं पर काबू पाया गया, सिवनी के नागरिक इस बात के गवाह हैं।

पुलिस महानिदेशक ऋषि कुमार शुक्ला के द्वारा 02 मार्च को इस मामले में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अवध किशोर पाण्डेय की पीठ थपथपाई गई। अवध किशोर पाण्डेय को भेजे गए प्रशंसा पत्र में डीजीपी ने कहा था कि सिवनी पुलिस के द्वारा अपराधों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सार्थक और प्रभावी प्रतिबंधात्मक कार्यवाही की गई। डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला ने इसकी प्रशंसा की थी। उन्होने कहा था कि सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वाले असमाजिक तत्वों, बलात्कार के अपराधियो, छेड़छाड़, संपत्ति संबंधी एवचं आदतन अपराधियों के कुल 1252 प्रकरणों में से 689 करे बाऊॅड ओवर करने से कुल अपराधों में 28.19 प्रतिशत की कमी परिलक्षित हुई। इस कमी को पुलिस महानिदेशक के द्वारा उपलब्धि निरूपित किया था। डीजीपी ने सांप्रदायिक दंगा फैलाने वाले अपराधों में शत प्रतिशत कमी को भी सराहा था।

ज्ञातव्य है कि सांप्रदायिक दृष्टि से सिवनी जिला प्रदेश के अति संवेदनशील जिलों की फेहरिस्त में शामिल है। सिवनी में अक्टूबर 2015 से 08 अप्रैल 2016 तक सांप्रदायिक दंगों की श्रृंखला चली थी। सिवनी पुलिस के द्वारा 1075 आरोपियों के खिलाफ धारा 110 दण्ड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत कार्यवाही की गई थी। इनमें से 548 अपराधियों को 03 साल के लिए बाऊण्ड ओवर किया गया था। इन 548 में से महज 06 अपराधियों के द्वारा बाऊंड ओवर होने के पश्चार सदाचार भंग कर अपराध किया गया था, उनके खिलाफ भी धारा 122 दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत इसतगाशा जमानत मुचलका जप्त करने एवं बाऊण्ड ओवर की शेष अवधि हेतु जेल में निरूद्ध रखने के प्रकरण पेश किए गए थे।

इस तरह की प्रतिबंधात्मक कार्यवाही का ही परिणाम था कि अप्रैल 2016 से सिंतबर 2016 में महज छः माह में ही भादवि के अपराधों में 19.10 प्रतिशत की कमी हुई, इसके अलावा छेड़छाड़ में 26 फीसदी तो बलात्कार के मामलों में 31 प्रतिशत की कमी हुई थी।

पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2015 में हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, लूट, गृह भेदन, साधारण चोरी, पशु चोरी, वाहन चोरी, शीलभंग, बलवा, बलात्कार, अपहरण, सहित सारे अपराध मिलाकर 2302 की तादाद थी जिसका प्रतिशत 18.24 ज्यादा था। वर्ष 2016 में इनकी तादाद 2205 थी एवं वर्ष 2017 में इसकी तादाद घटकर 1849 पर जा पहुंची।

जिले में बढ़ते अपराधों पर अगर नज़र डाली जाए तो रातों रात तो यहां अपराध नहीं ही बढ़े होंगे। कहीं न कहीं पुलिस भी प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर इसके लिए जवाबदेह मानी जा सकती है। पुलिस के थानों का सूचना तंत्र, गुप्तचर तंत्र सहित अनेक कारक है जिनके चलते अपराधों का ग्राम तेजी से बढ़ रहा था।

जिले में रोजगार के साधनों के न होने के चलते युवा पथ भ्रष्ट होता जा रहा है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। जिले के जंगलों में जगह जगह जमने वाली जुएं की फड़ों में युवाओं की आदम रफत की खबरें निराधार नहीं मानी जा सकती हैं। तत्कालीन जिला पुलिस अधीक्षक ए.के. पाण्डेय के कार्यकाल में जुएं की फड़ों का संचालन बदस्तूर जारी ही रहा। वर्तमान में कुछ स्थानों पर पुलिस के द्वारा छापेमारी की जाकर फड़ों को पकड़ा जा रहा है। जाहिर है अगर पुलिस चाहे तो जिले में जुंआ और सट्टा पूरी तरह बंद हो सकता है।

यह थी जिले में पुलिसिंग को सुधारने वाले अवध किशोर पाण्डेय की बात। अब बात की जाए दूसरे पाण्डेय की तो वे हैं नवनीत पाण्डेय। ये वर्तमान में मुख्य नगर पालिका अधिकारी के पद पर तैनात हैं। नवनीत पाण्डेय के द्वारा आकण्ठ भ्रष्टाचार में डूबी नगर पालिका परिषद को सुधारने का काम किया है। उनके द्वारा लीक से हटकर किए जाने वाले कार्य से उन लोगों के पेट में मरोड़ उठना स्वाभाविक है, जिनके द्वारा अब तक की सड़ांध मारती व्यवस्था की आड़ में निहित स्वार्थ साधे जाते रहे हैं।

शहर का नागरिक तो नवनीत पाण्डेय के द्वारा की गई अब तक की व्यवस्थाओं से संतुष्ट ही होंगे, क्योंकि नगर पालिका में अब माहौल बदला हुआ दिख रहा है। पर सहायक ग्रेड तीन यानी लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों की कुर्सी बदलने पर पालिका के कुछ चुने हुए प्रतिनिधि आखिर आसमान सर पर उठा रहे हैं? यह बात नागरिकों के बीच चर्चा और शोध का विषय बन चुकी है।

शहर में रद्दोबदल के नाम पर जिस तरह से नए निर्माण किए जा रहे हैं वह भी बिना किसी नियम कायदों को ध्यान में रखे हुए, वह भी जांच का ही विषय माना जा सकता है। नवनीत पाण्डेय के द्वारा अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए लिपिकों का स्थानांतरण किया गया है तो इस पर शायद ही किसी को आपत्ति होना चाहिए।

सिवनी पुलिस के मुखिया रहे अवध किशोर पाण्डेय के द्वारा पिछले साल की गई कार्यवाही और वर्तमान में नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी नवनीत पाण्डेय के द्वारा की जा रही सख्त कार्यवाही को देखते हुए आम नागरिकों के मुंह से बरसर ही निकल रहा होगा एक वो पाण्डेय जी शहर की फिजा को सुधार गए और एक ये पाण्डेय जी नगर पालिका को भ्रष्टाचार, अनाचार, अव्यवस्थाओं आदि से मुक्त कराकर ही रहेंगे . . .।



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