एनएसयूआई बंद करे अनर्गल प्रलाप

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। छात्र संघ चुनाव में आखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को मिली सफलता, एबीवीपी के निरंतर छात्रहित में किये जा रहे कार्याें का परिणाम है।

उक्ताशय की बात आखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक अंकित सिंह ठाकुर ने एनएसयूआई द्वारा लगाये जा रहे आरोपों का जवाब प्रेस को जारी विज्ञप्ति के माध्यम से देते हुए कहा कि राष्ट्रवादी विचार धारा से छात्रों ने भानुमति के कुनबे को जो करारी शिकस्त दी है उससे परिषद की विरोधी शक्तियां तिलमिला गयीं हैं।

उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में पूरी शक्ति झोंकने और जोड़तोड़ करने के पश्चात भी एनएसयूआई के नेत्तृत्व में समता मंच शिवसेना जैसे छात्र संगठन असफल होने से अनर्गल आरोप लगाकर व्यर्थ का जो प्रलाप कर रहे है उससे वे हास्य का पात्र बन रहे हैं। चुनाव में पूर्वनिर्धारित शर्मनाक हार पर पर्दा डालने का असफल प्रयास परिषद के विरोधी संगठन और एनएसयूआई के नेता कर रहे हैं।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जो भी चुनाव प्रक्रिया को समझता है वह इनके आरोपों को धूर्तता पूर्ण निरूपित कर रहा है। छात्रसंघ की चुनाव प्रक्रिया को पूर्ण रूप से समझने वाले भली भांति परिचित हैं कि चुनाव में एक-एक वोट की गिनती प्रत्येक संगठन के पदाधिकारियों को रहती है।

उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने 37 कक्षा प्रतिनिधियों को एक साथ एक दूसरे से मिलाकर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव एवं सह सचिव के नामों की घोषणा कर उनसे परिचय करा कर महाविद्यालय परिसर में प्रवेश कराया। इसी प्रकार एनएसयूआई, समता मंच, शिवसेना एवं निर्दलीय ने भी मिलकर अपने कक्षा प्रतिनिधियों को एकत्रित कर कॉलेज में प्रवेश कराया।

अंकित सिंह ठाकुर ने आगे कहा कि एनएसयूआई की महाविद्यालय में जो दयनीय स्थििति है उसकी हकीकत यह है कि एनएसयूआई अपने बल पर अकेले चुनाव लड़ने की सामथर््य नहीं रखती। उसे समता मंच शिवसेना और निर्दलीयों से शर्मनाक समझौता करना पड़ा और उनसे अध्यक्ष के स्थान पर उपाध्यक्ष का पद एनएसयूआई को भीख में माँगना पड़ा।

उन्होंने कहा कि परिषद के विरूद्ध चुनाव में जुड़े इस भानुमति के कुनबे के स्वयं के कितने कक्षा प्रतिनिधि थे इसकी जानकारी इन्हें एवं इनके पदाधिकारियों को नहीं है। श्री ठाकुर ने आगे कहा कि कॉलेज में 66 कक्षा प्रतिनिधियों ने 04 पदों के लिये अपना मतदान किया कुल 264 वोट हुये।

इसके साथ ही उन्होेंने कहा कि इन मतों की गिनती में प्रक्रिया अनुसार लगभग एक घंटे का समय लगता है परंतु मतदान के 20 मिनिट के अंदर बिना कोई सूचना के एनएसयूआई, समता मंच, शिवसेना एवं निर्दलीय को यह कैसे पता चल गया कि वह जीत गये। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने 33 मत प्राप्त किये और जो एकमत रिजेक्ट हुआ वह भी विद्यार्थी परिषद का था और 03 वोट क्रॉस भी हुए इसके बाद भी विद्यार्थी परिषद ने एक वोट से जीत हासिल की।

उन्होंने कहा कि अन्य संगठन की बैसाखी और क्रॉस वोटिंग के भरोसे चुनाव जीतने का ख्याली पुलाव पकाने वाली एनएसयूआई आज भी खुले मैदान में कक्षा प्रतिनिधियों एकत्रित कर गिनती कर ले तो हकीकत सामने आ जायेगी। एनएसयूआई, विद्यार्थी परिषद की जीत से ऐसी बौखलायी है कि वह आरोप लगा रही है कि भाजपा नेताओं के कारण विद्यार्थी परिषद जीती है।

इस आरोप के जवाब में श्री ठाकुर ने कहा कि महाविद्यालय के आसपास काँग्रेस नेताओं की उपस्थिति प्रमाणित है। काँग्रेस के राष्ट्रीय पदाधिकारी राजा बघेल, नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष संतोष नानू पंजवानी, मो.असलम, चीकू सक्सेना, शिव सनोडिया, पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष राजिक अकील, पार्षद इब्राहिम और कई ऐसे बड़े-बड़े पदाधिकारी एनएसयूआई को जिताने के लिये पूरा दबाव बनाने के लिये प्रयासरत रहे परंतु छात्रों ने छात्रहित में काम करने वाले राष्ट्रीय विचार वाले संगठन विद्यार्थी परिषद को छात्र संघ में विजय दिलाकर अपने संवैधानिक अधिकार का निर्भीकता के साथ जो परिचय दिया है वह एनएसयूआई की तिलमिलाहट का कारण है और इसका निकट भविष्य में कोई समाधान नहीं है।



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