ओव्हर लोड शालेय वाहनों के लिये जारी हो हेल्प लाईन नंबर

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों को लाने ले जाने वाले ओव्हर लोड (निर्धारित से अधिक तादाद में विद्यार्थी बैठाने वाले) वाहनों की शिकायत के लिये हेल्प लाईन नंबर या व्हाट्सएप नंबर जारी किये जाने की माँग एक बार फिर उठ रही है ताकि पालक या अन्य लोग शालेय परिवहन में लगे वाहनों के बारे में सचित्र शिकायत कर सकें।

ज्ञातव्य है कि जबलपुर आरटीओ के द्वारा पिछले साल शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों को लाने ले जाने के लिये व्हाट्सएप नंबर (997 7559 956) जारी किया गया था। इस नंबर पर ओव्हर लोड एवं नियमों को बलाए ताक पर रखकर चल रहे ऑटो या छोटा हाथी की फोटो अपलोड करने पर उनका परमिट निरस्त करने की कार्यवाही किये जाने की बात कही गयी थी। इसके साथ ही साथ कंप्यूटर पर ऑटो या छोटा हाथी को लॉक भी करने की बात कही गयी थी ताकि उस वाहन को परमिट न जारी किया जाये।

ज्ञातव्य है कि पूर्व में तत्कालीन जिला कलेक्टर भरत यादव के द्वारा स्कूली ऑटो में पाँच से ज्यादा बच्चे बैठाने पर प्रतिबंध लगाया गया था। उस दौरान कुछ समय तक तो परिवहन विभाग एवं यातायात पुलिस के द्वारा सड़कों पर उतरकर ऑटो चालकों के खिलाफ कार्यवाही की गयी थी, किन्तु भरत यादव के स्थानांतरण के उपरांत मामला ठण्डे बस्ते के हवाले कर दिया गया।

पालकों के बीच चल रहीं चर्चाओं के अनुसार सिवनी में स्कूली वाहनों में बच्चों को ठसाठस भरकर ले जाया जाता है। इतना ही नहीं सर्वाेच्च न्यायालय के द्वारा शालेय वाहनों के संबंध में दिये गये दिशा निर्देशों का भी सरेआम माखौल ही उड़ाया जाता है। इस सबके बाद भी इस मामले में न तो क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी और न ही यातायात पुलिस के द्वारा किसी तरह की कार्यवाही की जा रही है।

हाल ही में इंदौर में डीपीएस की शालेय बस के हादसे के उपरांत अब पालकों के मन में अपने लाड़लों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। सिवनी मंें शालेय परिवहन में लगे वाहनों की न तो जाँच की जाती है और न ही उसमें कितने विद्यार्थियों को बैठाकर परिवहन किया जा रहा है, इसकी ही ंिचंता की जाती है।

कुछ पालकों का कहना है कि जिला प्रशासन को चाहिये कि शालेय बच्चों का परिवहन करने वाले वाहनों के लिये एक हेल्प लाईन नंबर स्थानीय स्तर पर जारी किया जाना चाहिये। महानगरों में प्रत्येक शालेय वाहन को पीले रंग से रंगे जाने के साथ ही साथ उस वाहन में स्थानीय हेल्प लाईन नंबर को बड़े-बड़े पठनीय अक्षरों में भी आवश्यक रूप से लिखा जाता है।

माना जा रहा है कि अगर जिला प्रशासन के द्वारा भी जबलपुर आरटीओ द्वारा पिछले साल जारी व्हाट्सएप नंबर की तर्ज पर अगर सिवनी में भी शालेय परिवहन में लगे वाहनों के संबंध में कदम उठाया जाता है तो इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। संवेदनशील जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड से जनापेक्षा है कि बच्चों से जुड़े इस जनहित के मामले में वे स्वसंज्ञान से उचित कदम उठायें।



8 Views.

Related News

(शरद खरे) सामान्य शब्दों में नगर के पालक की भूमिका अदा करने वाली संस्था को नगर पालिका कहा जाता है।.
मामला मोहगाँव-खवासा सड़क निर्माण का (संजीव प्रताप सिंह) सिवनी (साई)। अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल की महत्वाकांक्षी स्वर्णिम चर्तुभुज.
अट्ठारह करोड़ के काम को दस करोड़ में कैसे करेगा ठेकेदार! (अखिलेश दुबे) सिवनी (साई)। गृह निर्माण मण्डल के द्वारा.
(महेश रावलानी) सिवनी (साई)। जनवरी में शहर में अमूमन धूप गुनगुनी और रात के वक्त सर्दी के तेवर तीखे रहा.
सिविल सर्जन की आँखों का नूर . . . 02 (अय्यूब कुरैशी) सिवनी (साई)। स्वास्थ्य संचालनालय चाहे जो आदेश जारी.
(ब्यूरो कार्यालय) सिवनी (साई)। शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सिवनी के वनस्पति शास्त्र विभाग में एक अनुपम पहल के चलते वनस्पति विज्ञान.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *