कम बारिश, सम्हल जायें

(शरद खरे)

इस साल मौसम विभाग की भविष्यवाणियों पर पानी फिरता दिख रहा है। मौसम विभाग के द्वारा इस साल औसत से अधिक वर्षा की बात कही गयी थी, किन्तु सावन और आधा भादों बीतने के बाद भी सिवनी में अब तक औसत वर्षा महज 659.4 मिली मीटर दर्ज की गयी है, जबकि पिछले साल इस अवधि में औसत वर्षा 1004.1 मिली मीटर वर्षा दर्ज की गयी थी।

ये संकेत अच्छे नहीं कहे जा सकते हैं कि इस साल औसत वर्षा में कमी दर्ज की गयी है। अगर यही आलम रहा तो सिवनी के ताल तलैयों में पानी की कमी होगी और उसके बाद खेती में किसानों के लिये एवं पेयजल के संकट का भी हाहाकार मचने लगेगा। सिवनी में पानी की कमी वैसे भी सदा से ही रही है।

देखा जाये तो सिवनी जिले में स्थायी निकायों के द्वारा जल संरक्षण की दिशा में ज्यादा संजीदगी के साथ प्रयास नहीं किये जाते रहे हैं। स्थानीय निकायों के द्वारा भवन निर्माण की अनुमति ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की शर्त पर दी जाती है। सिवनी शहर में ही कितने आवासों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की गयी है इसका ही अगर सर्वे करा लिया जाये तो निश्चित तौर पर एक बड़ा घोटाला प्रकाश में आ सकता है।

जिला प्रशासन को चाहिये कि सबसे पहले सरकारी कार्यालयों की इमारतों में ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाया जाये। विडम्बना ही कही जायेगी कि सरकारी कार्यालयों में ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं है तो दीगर निजि इमारतों की कौन कहे। निजि इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग न होने से भूमिगत जल स्तर तेजी से नीचे गिरता जा रहा है।

सिवनी में नलकूप खनन के आंकड़े अगर निकाले जायें तो लगभग दस से पंद्रह साल पहले सिवनी में भूमिगत जल सौ से डेढ़ सौ फीट पर मिल जाया करता था। अब यह जल स्तर बढ़कर चार सौ से ज्यादा पहुँच चुका है। चार सौ फीट से ज्यादा नीचे से पानी खींचनें में मोटर भी हाँफने ही लगती हैं।

वैसे भी यह बात स्थापित सत्य के रूप में सामने आ चुकी है कि आने वाले समय में पानी कितना अमूल्य हो जायेगा। इस साल कम बारिश के चलते अब लोग इस बात की चर्चाएं करते नजर आ रहे हैं कि अगर जलाशय नहीं भरे तो गर्मी में सिंचाई और पेयजल का टोटा हो जायेगा।

अभी भी समय है, हमें सम्हलना होगा। सांसद, विधायकों और अन्य जन प्रतिनिधियों सहित प्रशासन को इस बारे में सोचना ही होगा, कि जल का संरक्षण किस तरह किया जा सकता है। इसके लिये जरूरी हो तो विशेषज्ञों की मदद ली जाये। संवेदनशील जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड से जनापेक्षा है कि जिले में कम से कम सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य किया जाये ताकि भूजल स्तर को बढ़ाया जा सके।



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