कल से दवाओं की हो सकती है किल्लत!

 

कोड पता नहीं होने से दुकानदारों ने नहीं भेजे नये ऑर्डर!

(वाणिज्य ब्यूरो)

सिवनी (साई)। आप यदि बीमार हैं और नियमित दवाओं की जरूरत आपको होती है तो वे दवाएं आप स्टाक में रख लीजिये। इसका कारण जीएसटी का एचएसएन कोड नहीं आने से अनेक दवा विक्रेताओं के द्वारा दवाओं के ऑर्डर नहीं दिया जाना बताया जा रहा है।

दवा व्यापारियों के बीच चल रही चर्चाओं के अनुसार यह हो सकता है कि 01 जुलाई के बाद आपको दवाएं तत्काल न मिलें। उन्होंने बताया कि बहुत सी दवाओं के लिये जीएसटी का एचएसएन कोड अभी तक नहीं आया है। जीएसटी लागू होने के बाद बिलिंग में हर दवा का एचएसएन कोड होगा और उसी के हिसाब से टैक्स लिया जायेगा। कोड नहीं पता होने की वजह से दवा दुकानदारों ने दवा कंपनियों को इस माह नया ऑर्डर नहीं भेजा है।

चर्चाओं के अनुसार 01 जुलाई से अन्य उत्पादों की तरह दवाओं पर भी जीएसटी लगाया जा रहा है। रिटेलर इस माह से ही अपना स्टाक क्लियर कर रहे हैं, ताकि पुराने स्टाक पर टैक्स का झंझट उन पर न आये। इससे वे नया ऑर्डर नहीं दे रहे हैं। दवा कंपनियां भी अपने पास पड़े स्टाक को क्लियर करने स्टाकिस्ट और रिटेलर को 07 से 12 प्रतिशत तक डिस्काउंट दे रहे हैं।

चर्चाओं के अनुसार इसके बाद भी स्टाकिस्ट और रिटेलर दवा कंपनियों को ऑर्डर नहीं भेज रहे हैं। स्टाकिस्ट और रिटेलर का मानना है कि जीएसटी के बाद उन्हें टैक्स कम देना होगा। इससे वे पुराने माल को नहीं खरीद रहे। जीएसटी में अधिकतर दवाओं पर 12 प्रतिशत टैक्स लगेगा और जीवन रक्षक दवाओं पर 05 प्रतिशत टैक्स लगेगा। इससे स्टाकिस्ट दवाओं का नया ऑर्डर नहीं कर रहे हैं।

वहीं, दवा विक्रेताओं के अनुसार जीएसटी के लिये दवाओं का एचएसएन कोड जरूरी होता है। अधिकतर दवाओं के लिये अब तक कोड आया ही नहीं। इनमें वे दवाएं और फ्ल्यूड शामिल हैं जिनका ऑपरेशन में उपयोग होता है इसके अलावा अन्य बीमारियों में डॉक्टर प्रायः रोज प्रेस्क्राईब कर रहे हैं। इनमें फ्ल्यूड्स जैसे डेक्स्ट्रोज, डीएनएस, एनएस शामिल हैं।

दवा विक्रेताओं के अनुसार इसके अलावा एंटीबायटिक सिप्रोफ्लोक्सासिन, ओफ्लाक्सिासिन व बुखार के लिये पैरासिटेमाल व डिहाईड्रेशन होने पर इलेक्ट्रोलायट पाउडर व डायलिसिस फ्ल्युड, ऑपरेशन के लिये इस्तेमाल होने वाले प्रोलाईन मेश व स्किन स्टेपलर शामिल हैं। इनके एचएसएन कोड और टैक्स के बारे में कोई जानकारी दवा विक्रेताओं के पास नहीं पहुंची है।

दवा विक्रेताओं के अनुसार जीएसटी में पंजीकृत होने के बाद जैसे ही दवा विक्रेता 01 जुलाई के बाद दवाएं बेचेंगे तो बिल बनाना जरूरी होगा। बिल बनाने के लिये वे जैसे ही फॉर्मेट खालेंगे, कम्प्यूटर एचएसएन कोड मांगेगा। यदि कोड नहीं होगा तो टैक्स भी वे नहीं लगा सकेंगे।



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