कहाँ है भ्रष्ट जिलों का रैंकिंग कार्ड

(इसरार खान)

भोपाल (साई)। उत्सव के बहाने तलाशने वाली मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार के हाथ एक बड़ी सफलता लगी है लेकिन फिर भी सरकार परेशान है।

मुख्य सचिव कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सरकार ने प्रदेश के भ्रष्ट जिलों की रैंकिंग रिपोर्ट तैयार करवायी। भोपाल सहित 16 जिले भ्रष्टाचार से मुक्त पाये गये लेकिन सरकार ने यह रिपोर्ट सार्वजनिक तक नहीं की। जबकि ऐसे मौकों पर प्रदेश में अक्सर उत्सव मनाये जाते हैं लेकिन इस मामले में सरकार ने गुपचुप पूरी फाईल को भी दबा दिया। स्थिति यह है कि अब इस विषय पर दिग्गजों ने चुप्पी साध ली है जबकि प्रशासनिक गलियारों में इस रिपोर्ट को लेकर माहौल गर्म है।

सूत्रों ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से डाटा जमा किया गया था। एसीएस प्रभांशु कमल ने कलेक्टरों ने तीन प्रपत्रों पर हर महीने की 04 तारीख को जानकारी भेजने के लिये कहा था। पहले तो कलेक्टरों ने जानकारी भेजने में ही लापरवाही की। एसीएस प्रभांशु कमल के बार-बार रिमांइड कराने के बाद 04 अक्टूबर को पहली बार पूरी जानकारियां जीएडी के हाथ लगीं।

इसके साथ ही सूत्रों ने बताया कि इसके आधार पर रिपोर्ट तैयार की गयी। लिस्ट में भोपाल एवं छतरपुर सहित 16 ऐसे जिले हैं जिन्हंे भ्रष्टाचार से मुक्त माना गया, जबकि भिंड को सबसे ज्यादा भ्रष्ट जिला माना गया। कहा जाता है कि भिंड में सीएम शिवराज सिंह चौहान के पसंदीदा आईएएस इलैया टी राजा कलेक्टर हैं।

किस तरह किया भ्रष्ट जिलों का निर्धारण : भ्रष्ट जिलों के चयन के लिये लोकायुक्त की कार्यवाहियां, ईओडब्ल्यू प्रकरणों, सीएम हेल्पलाईन में दर्ज हुईं शिकायतों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ चल रहीं विभागीय जाँच, नोटिस जैसी कार्यवाहियों के आधार बनाया गया। जिस जिले में सबसे ज्यादा शिकायतें और कार्यवाहियां मिलीं उसे भ्रष्ट जिला माना गया। सरकार के पास जमा हुई जानकारी में भोपाल समेत 16 जिले ऐसे सामने आये जहाँ एक भी शिकायत या कार्यवाही नहीं हुई।

कलेक्टरों को क्या है परेशानी : भ्रष्ट जिले तय करने की प्रक्रिया पर कलेक्टरों ने ही सवाल खड़े कर दिये हैं। उनका कहना है कि जिस जिले में भ्रष्टों पर लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू ज्यादा कार्यवाही करे, सीएम हेल्पलाईन में ज्यादा मामले आये, लापरवाहों की विभागीय जाँच, नोटिस ज्यादा जारी किये जाये वही जिला सबसे टॉप कैसे घोषित किया जा सकता है। कलेक्टरों का कहना है कि जिन जिलों ने भ्रष्ट और लापरवाहों पर ज्यादा कार्यवाही की उन्हें तो पुरूस्कृत किया जाना चाहिये। भ्रष्ट जिले की रैंकिंग प्रक्रिया ही गलत है।

सरकार ने क्यों लिया यूटर्न : कलेक्टरों द्वारा सवाल खड़े किये जाने के बाद सरकार इस रैंकिंग की सार्वजनिक घोषणा करने से पीछे हट गयी है। सरकार का मानना है कि यह प्रक्रिया हर हाल में नुकसानदायक होगी। 2018 में चुनाव आ रहे हैं। राज्य सरकार ने भ्रष्ट जिलों की रैंकिंग करने का जो फॉर्मूला तय किया है उसमें हर माह कोई न कोई जिला टॉप पर रहना तय है। यदि एक-एक कर अलग – अलग जिले टॉप पर आ गये और सार्वजनिक घोषणा की गयी तो उन जिलों की किरकिरी होगी। ऐसे में अफसर नाराज होंगे। सरकार अब कलेक्टरों को नाराज नहीं करना चाहती है। इसलिये भी इसकी घोषणा से सरकार पीछे हट रही है।



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