कितनी संवैधानिक हैं पारंपरिक ग्राम सभाएं!

घंसौर क्षेत्र में पारंपरिक ग्राम सभाओं का गठन जारी!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील में पारंपरिक ग्राम सभाओं के गठन की पदचाप सुनायी देने लगी है। इन पारंपरिक ग्राम सभाओं के जरिये आदिवासी समाज के लोगों को संविधान की व्याख्या अपने हिसाब से करायी जाकर उन्हें बरगलाने का प्रयास किया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ बाहरी तत्वों के द्वारा घंसौर में अपनी उपस्थिति दी जाकर आदिवासी समुदाय के बीच पारंपरिक ग्राम सभाओं के बारे में बताया जा रहा है। इसके तहत कहा जा रहा है कि पाँचवीं अनुसूचि एवं संविधान के अनुच्छेद 244 (1) के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्रों के आदिवासियों को स्वशासन एवं नियंत्रण का अधिकार दिया गया है।

बताया जाता है कि इसके साथ ही साथ यह भी कहा जा रहा है कि आदिवासियों की रूढ़ी और प्रथा को विधि (कानून) का बल प्राप्त है अर्थात आदिवासी क्षेत्रों में लोकसभा एवं विधानसभा द्वारा पारित कानून की बजाय आदिवासियों की परंपरागत ग्राम सभा के कानून प्रभावी रहेंगे।

इसके साथ ही बताया जाता है कि आदिवासियों को बरगलाते हुए संविधान की व्याख्या अपने हिसाब से की जाकर कहा जा रहा है कि भारत के संविधान के अनुसार आदिवासी क्षेत्रों में गैर आदिवासियों को भ्रमण, निवास एवं व्यवसाय की अनुमति नहीं है। साथ ही खनिज एवं प्राकृतिक संसाधनों पर भी आदिवासी समाज का मालिकाना हक है।

बताया जाता है कि इन तत्वों के द्वारा आदिवासियों को बरगलाकर यह भी कहा रहा है कि आपसी झगड़ों व जमीन संबंधी विवादों के लिये पुलिस या न्यायालय के पास जाने की जरूरत नहीं है। ये सारे विवाद आदिवासी समाज के लोगों के द्वारा आदिवासी समाज के द्वारा आपस में मिलकर या पारंपरिक ग्राम सभा के जरिये इसका निपटारा किया जा सकता है।

इसके साथ ही बताया जाता है कि इन तत्वों के द्वारा आदिवासियों को बरगलाकर यह भी कहा जा रहा है कि संविधान के भाग 10 में अनुसूचित और जनजाति क्षेत्रों का वर्णन है। आदिवासी समाज के प्रशासन और नियंत्रण  का वर्णन है। अनुसूचित क्षेत्रों के लिये विशेष व्यवस्था की गयी है। मतलब साफ यह है कि 5वीं अनुसूची के पैरा 244 (1) के तहत संविधान द्वारा घोषित अनुसूचित क्षेत्र में आदिवासियों के अनुसार राज चलेगा।

बताया जाता है कि इस तरह के संदेशों का भी आदान – प्रदान किया जाकर आदिवासियों को जमकर बरगलाया जा रहा है। पाँचवीं अनुसूची के नाम पर आदिवासियों के बीच विषवमन का काम भी तेजी से चल रहा है। संदेशों में यह भी कहा जा रहा है कि पाँचवीं अनुसूची के अनुसार 20 सदस्यों की एक टीम है जिसे जनजाति सलाहकार परिषद कहा जाता है।

(क्रमशः जारी)



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