किसानों में खदबदाता दिख रहा असंतोष

भावांतर योजना के भंवर में . . . 04, किसी को नहीं पता कब और कितना मिलेगा भावांतर?

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। शिवराज सिंह चौहान के नेत्तृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश सरकार के द्वारा भावांतर योजना को किसानों के हित में लागू किया गया है किन्तु अब यह योजना सरकार के लिये गले का फांस बनती दिख रही है। इसका कारण यह है कि किसान कल्याण विभाग के आला अधिकारियों के द्वारा भी किसानों के सवालों का जवाब नहीं दिया जा पा रहा है।

किसान कल्याण विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि प्रदेश सरकार के द्वारा किसानों को व्यापारियों के चंगुल से आजाद करने, उनके साथ होने वाली धोखाधड़ी और उनकी उपज के वाजिब मूल्य को दिलवाने की मंशा से भावांतर योजना का आगाज किया गया है।

सूत्रों ने बताया कि इसके व्यापक प्रचार – प्रसार के अभाव में अब यह योजना किसानों के गुस्से का कारण बनती जा रही है। अनेक किसानों का कहना है कि उन्हें इस योजना का पता ही नहीं है। किसानों की उपज किस भाव में खरीदी जायेगी? उन्हें कितना भावांतर मिलेगा? और सबसे बड़ी बात यह भावांतर की राशि उन्हें कब मिल पायेगी? इस बारे में भी अभी तक कुहासा छंट नहीं सका है।

सिमरिया स्थित कृषि उपज मण्डी में किसानों के बीच चल रहीं चर्चाओं के अनुसार इस योजना के चलते न तो किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य ही मिल पा रहा है और न ही योजना का लाभ ही उन्हें मिलता दिख रहा है। इसके चलते किसानों में नाराजगी जमकर बढ़ती दिख रही है।

सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि भावांतर भुगतान योजना के तहत मंडियों में 16 अक्टूबर से 08 तरह की फसलों की खरीददारी आरंभ हो गयी है, लेकिन अभी तक किसी भी किसान को लाभ नहीं मिला है। इस योजना में किन राज्यों की किन मण्डियों के भावों के औसत को निकालकर भावांतर तय किया जायेगा यह बात भी अभी तक स्पष्ट नहीं हो सकी है।

अनेक किसानों ने बताया कि भावांतर योजना के प्रचार – प्रसार के अभाव में उनके द्वारा इस योजना के तहत अपना पंजीयन तक नहीं कराया गया है। जब किसान अपनी फसल लेकर मण्डी पहुँचे तब उन्हें इस योजना की जानकारी मिली। इससे किसान अब अपने आपको लुटा-पिटा ही महसूस कर रहा है।

उधर, इस योजना के तहत लाभ पाने की उम्मीद से जिन किसानों के द्वारा इसका लाभ लेने का मन बनाया गया और वे अपनी फसल लेकर मण्डी पहुँचे उन्हें न ही फसल का मॉडल रेट नगद मिल पा रहा है और न ही इसका भावांतर ही उन्हें मिल पा रहा है। भावांतर उनके पास तक कब पहुँचेगा इस बात को लेकर भी किसान संशय में ही दिख रहे हैं। कहा जा रहा है कि भावांतर की राशि किसानों को अगले साल जनवरी में ही मिल पायेगी।



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