कुंए का पानी पीकर बीमार पड़े ग्रामीण

दूषित पानी बन रहा लोगों की बीमारी का कारण

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। सिवनी विधानसभा अंतर्गत आने वाले एक गाँव में कुंए का पानी पीकर कई ग्रामीण अस्वस्थ्य हो गये जिन्हें उपचारार्थ जिला चिकित्सालय में दाखिल कराया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बण्डोल थाना के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत परासिया के ग्राम गोरखपुरखुर्द में लगभग सौ घर स्थित हैं जिसमें लगभग साढ़े तीन सौ से ज्यादा वाशिंदे निवास करते हैं। बताया जाता है कि इस ग्राम में नल-जल योजना पिछले लंबे अर्से से ठप्प पड़ी हुई है। ऐसी स्थिति में यहाँ निवासरत ग्रामीण, गाँव में ही स्थित एक मात्र कुंए से अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं जो सरकारी कुंआ है।

बताया जाता है कि उक्त कुंआ भी अब सूखने की कगार पर जा पहुँचा है। इसी कुंए के पास एक डबरा बना हुआ है जहाँ मवेशियों को पानी पिलाया जाता है। बताया जाता है कि वर्तमान में इसी डबरे का पानी रिसकर उस एकमात्र कुंए में जा रहा है जिसका पानी पीकर ग्रामीण अपना जीवन यापन करने पर मजबूर हैं।

इसी कुंए का पानी पीकर आज कई ग्रामीण एक के बाद एक जब अस्वस्थ्य होने लगे तब ऐसी स्थिति में इसकी जानकारी 108 एंबूलेंस को दी गयी। सूचना पाकर 108 एंबूलेंस मौके पर पहुँची जहाँ 108 एंबूलेंस के सदस्यों ने देखा कि अस्वस्थ्य ग्रामीणों की तादाद इतनी अधिक है कि उन्हें एक ही एंबूलेंस के माध्यम से जिला चिकित्सालय नहीं पहुँचाया जा सकता है।

ऐसी स्थिति में दूसरी एंबूलेंस को कॉल करके प्रभावित ग्राम में बुलाया गया। इन दोनों एंबूलेंस में लगभग 25 ग्रामीणों को भरा जाकर फिर उन्हें जिला चिकित्सालय सिवनी ले जाकर भर्ती कराया गया। जिला चिकित्सालय में भर्ती होने वालों में मीरा (30) पति सतेन्द्र गौंड, सेवती (27) पति सोनू सैययाम, संत कुमारी (36) पति महावीर बरकड़े, कृष्णकुमारी (43) पति गंगाराम बरकड़े, रनिया (40) पति वीरन मर्सकोले, सुनीरा (19) पिता सनीराम धुर्वे, वैजन्ती (17) पिता बिरसू धुर्वे, गनाराम (60) पिता कोहलू मर्सकोले, शिवचंद (50) पिता मंगल सिरसाम, गंगाराम (50) पिता सम्मू बरकड़े, अनुसुईया पिता बिरसू धुर्वे, वंदना पिता जिले सिंह धुर्वे, इंदिरा बाई एवं अन्य शामिल हैं।

जिला चिकित्सालय में डॉ.क्षयज काकोड़िया की देख-रेख में अस्वस्थ्य ग्रामीणों का उपचार तत्काल आरंभ कर दिया गया। उक्त संबंध में जानकारी लेने पर डॉ.क्षयज काकोड़िया ने बताया कि ग्रामीणों का उपचार फिलहाल उल्टी-दस्त का किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी का संक्रमण फैल भी सकता है।

इधर जिला चिकित्सालय में उपचाररत मरीजों ने बातचीत के दौरान बताया कि उनके गाँव में पीने के पानी की समस्या कई दिनों से बनी हुई है जिसकी ओर न तो प्रशासन ही ध्यान दे रहा है और न ही स्थानीय जन प्रतिनिधि ही इस दिशा में कोई प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों के निस्तार के लिये गाँव में एकमात्र कुंआ है जो अब सूखने की कगार पर जा पहुँचा है।

ग्रामीणों ने अपनी परेशानी व्यक्त करते हुए बताया कि उनके समक्ष जो सबसे बड़ी समस्या है वह यही है कि गाँव में लगभग सूख चुके इस कुंए से वे अपना काम चलायें अथवा मवेशियों को पानी पिलायें। उन्होंने बताया कि कुंआ और उसके ठीक समीप स्थित डबरा जब पूरी तरह सूख जाता है तब उन्हें गाँव से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित बीसावाड़ी ग्राम से पानी लाना पड़ता है। ग्रामीण इस बात से भी चिंतित दिखायी दिये कि ठण्ड के दिनों में जब ये हाल हैं तब आने वाले ग्रीष्म कालीन समय में क्या स्थिति बनेगी। जिला प्रशासन से इस ओर शीघ्र पहल जाने की अपेक्षा अस्वस्थ्य ग्रामीणों के द्वारा व्यक्त की गयी है।



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