कॉपी-किताब, गणवेश में लुटेंगे . . .04

फिर अलापा गया आठ दुकानों का आलाप!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। नया शैक्षणिक सत्र कल से आरंभ हो जायेगा। इसके पहले ही विद्यार्थियों के द्वारा अभिभवकों पर सिलेबस की कॉपी किताबें खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। चूंकि स्थितियां स्पष्ट नहीं हैं कि निजि विद्यालयों के द्वारा पाठ्य पुस्तक निगम और एनसीईआरटी की किताबों को चलन में लाया जायेगा अथवा नहीं, इसलिये पालक महंगी किताबें खरीदने पर मजबूर हो रहे हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि नये शैक्षणिक सत्र के आगाज के महज पांच दिन पहले 25 मार्च को जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा रस्म अदायगी के लिये एक आदेश जारी किया गया है। इस आदेश का पालन एक सप्ताह में कैसे संभव हो सकेगा जबकि यह आदेश ही तीन-चार दिनों में विद्यालयों के पास पहुंच सकेगा।

सूत्रों ने बताया कि सात कंडिकाओं से युक्त इस आदेश में जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा है कि किसी भी स्थिति में विद्यालय के द्वारा पाठ्य पुस्तकों, स्टेशनरी, गणवेश एवं अन्य सामग्री का विक्रय नहीं किया जायेगा। इसके अलावा जिले में संचालित अशासकीय निजि विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को गणवेश, पाठ्य पुस्तकें, अभ्यास पुस्तिकाएं सहित समस्त शिक्षण सामग्री को किसी दुकान विशेष से खरीदने के लिये बाध्य नहीं किया जायेगा।

इसी तरह सूत्रों की मानें तो इस आदेश में जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा है कि राज्य शासन एवं सीबीएसई से मान्यता प्राप्त निजि विद्यालय शिक्षण सत्र आरंभ होने के एक माह पूर्व संस्था में संचालित होने वाली पुस्तकों की सूची जिसमें पुस्तक का नाम, सीरीज उसके प्रकाशकों के नाम, पता और मूल्य का स्पष्ट उल्लेख हो एवं शिक्षण सत्र के दौरान स्कूल के द्वारा लिये जाने वाले समस्त शुल्क का विवरण ऑन लाईन एजूकेशन पोर्टल एवं विद्यालय के सूचना पटल पर अनिवार्य रूप से चस्पा करेंगे।

सूत्रों ने बताया कि इस आदेश में इस तरह के शुल्कों आदि की समस्त जानकारी की एक प्रति क्षेत्र के विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी के साथ ही साथ जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को अनिवार्य रूप से भेजने के लिये निजि विद्यालय प्रबंधन को ताकीद किया है।

इसके साथ ही सूत्रों ने बताया कि इस आदेश में सबसे अंत में रस्म अदायगी के लिये हर साल की तरह इस साल भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि निजि विद्यालयों में चलने वाली किताबों की सूची को कम से कम आठ दुकानों में उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाये। यह इसलिये क्योंकि पालकों की शिकायत है कि उन्हें एक दुकान विशेष से किताबें खरीदने पर मजबूर किया जाता है। यह सुनिश्चित कौन करेगा, इस बारे में आदेश में स्पष्ट नहीं किया गया है।

सूत्रों की मानें तो जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने आदेश में समस्त निजि शैक्षणिक संस्थाओं को आदेशित किया था कि वे 28 मार्च तक पुस्तकों की सूची एवं फीस निर्धारण संरचना पत्र को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आवश्यक रूप से जमा कराया जायंे, किन्तु अधिकतर संस्थाओं ने जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश को गंभीरता के साथ न लेते हुए इस पर अमल करना मुनासिब नहीं समझा है।



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