क्यों आरंभ नहीं हुआ छात्रावास!

 

(शरद खरे)

सिवनी जिले में अब तक बेलगाम अफसरशाही, बाबुओं की लालफीताशाही और चुने हुए प्रतिनिधियों की अनदेखी किस तरह हावी रही है इसका जीता जागता उदाहरण शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज में वर्ष 2013 से निर्माणाधीन कन्या छात्रावास से लगाया जा सकता है। वैसे जिला चिकित्सालय में नव निर्मित ब्हाय रोगी विभाग भवन, प्रसूति वार्ड के भवन और ट्रामा केयर यूनिट भी इसकी एक बानगी माने जा सकते हैं।

प्रियदर्शनी के नाम से सुशोभित इंदिरा गाँधी जिला चिकित्सालय के ब्हाय रोगी विभाग, प्रसूति वार्ड और ट्रामा केयर यूनिट के भवन बनकर तैयार हुए, उनका लोकार्पण भी हुआ पर एक साल से अधिक समय बाद इन भवनों में काम आरंभ हो पाया। इनमें से ट्रामा केयर यूनिट का भवन आज भी शोभा की सुपारी ही बना हुआ है। यक्ष प्रश्न यही है कि अगर इन भवनों को इतने समय तक व्यर्थ ही खाली रखना था तो फिर इनके निर्माण में जनता के गाढ़े पसीने से संचित राजस्व को क्यों बहाया गया?

इसी तरह शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज के खेल मैदान से लगे महिला छात्रावास भवन को अब तक आरंभ नहीं कराया जा सका है। लगभग अस्सी लाख की लागत का यह भवन लगभग चार सालों से बनकर तैयार है और इसका कोई उपयोग नहीं कर रहा है इसलिये यह भवन अब जर्जर अवस्था को प्राप्त होता जा रहा है।

आश्चर्य तो इस बात पर होता है कि अधिकतर सियासी कार्यक्रम पॉलीटेक्निक के मैदान पर आयोजित होते हैं। इस मैदान पर सिवनी के निर्दलीय विधायक दिनेश राय के द्वारा तीन सालों के बाद जनता की अदालत के कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया था। इसके बाद भी उन्हें एवं अन्य जनप्रतिनिधियों को मैदान से लगी हुई ठूंठ के मानिंद खड़ी यह बिल्डिंग दिखायी नहीं दी!

इस भवन के बनने के बाद इसका आधिपत्य मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंचरना मण्डल (हाऊसिंग बोर्ड) के द्वारा पॉलीटेक्निक प्रशासन को क्यों नहीं दिया गया? यह भी शोध का ही विषय माना जायेगा। बताते हैं कि इस भवन में अभी बिजली की फिटिंग बाकी है। अगर ऐसा है तो पॉलीटेक्निक प्रशासन और हाऊसिंग बोर्ड दोनों ही इसके लिये पूरी तरह दोषी माने जा सकते हैं।

इन चार सालों में अब तक न जाने कितनी छात्राएं पॉलीटेक्निक से तीन साल का पाठ्यक्रम पूरा कर उपाधि (डिग्री) हासिल कर जा चुकी होंगी। इन छात्राओं को शहर में अन्य वैध, अवैध कन्या छात्रावास या पेईंग गेस्ट (पीजी) में रहना पड़ा होगा। उन्हें निश्चित तौर पर पीजी या अन्य छात्रावास खोजने एवं वहाँ से कॉलेज आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा होगा। इसके लिये जवाबदेह आखिर कौन है?

पॉलीटेक्निक कॉलेज प्रदेश के तकनीकि शिक्षा विभाग के अधीन आता है। यह जिला मुख्यालय का मामला है। इस लिहाज से इस बारे में विधानसभा में जिले के चारों विधायक दिनेश राय, कमल मर्सकोले, रजनीश हरवंश सिंह एवं योगेंद्र सिंह को अपनी बात रखकर इसे आरंभ कराया जाना चाहिये था। विडम्बना ही कही जायेगी कि न तो विधायकों ने ही इसकी सुध ली और न ही देश-प्रदेश की चिंता करने वाले सिवनी के विज्ञप्तिवीरों ने ही इस मामले में कभी कुछ कहने की जहमत उठायी।

संवेदनशील जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड से जनापेक्षा है कि वे ही स्वसंज्ञान से अब इस छात्रावास को पूरा करने के लिये समय-सीमा तय करें और इस छात्रावास को आरंभ करायें ताकि ग्रामीण अंचलों से आने वाली छात्राओं को पॉलीटेक्निक में विद्या अध्ययन करने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।



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