क्षमता बढ़ी नहीं, हो रहा लाईन का विस्तार!

 

नलों में आ रहा कम दबाव से पानी, पालिका को नहीं इसकी चिंता

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। नगर पालिका सिवनी के द्वारा अदूरदर्शी नीति को अपनाकर जिस तरह से शहर की पेयजल व्यवस्था के नाम पर नित नये प्रयोग किये जा रहे हैं उससे आम नागरिक बुरी तरह आजिज़ ही आ चुके हैं। पार्षद भी अंदर ही अंदर इस मामले को लेकर कुपित हैं, पर खुलकर बोलने से परहेज ही कर रहे हैं।

सिवनी नगर पालिका परिषद का पिछला कार्यकाल हो या वर्तमान में परिषद का कार्यकाल दोनों ही में काम एक जैसा ही होता प्रतीत हो रहा है। लगभग ढाई साल बीतने के बाद अब लोग पिछली परिषद की कार्यप्रणाली और वर्तमान परिषद की कार्यप्रणाली में तुलना करने लगे हैं।

सिवनी में पानी की टंकियों की तादाद बढ़ाये बिना ही कमोबेश हर वार्ड में पाईप लाईन के विस्तारीकरण के काम को जमकर अंजाम दिया जा रहा है। इसका नतीजा यह सामने आ रहा है कि अब नलों में पानी का दबाव घटकर दस फीसदी से भी कम रह गया है। चौबीसों घंटे पानी देने वाले सार्वजनिक नल भी अब रोते ही नजर आ रहे हैं।

यह तो ठीक रहा कि मौसम का मिजाज गड़बड़ रहा और पानी की जरूरत ज्यादा महसूस नहीं की गयी। पानी की किल्लत ज्यादा नहीं होने से पालिका को आराम ही रहा। अब मौसम के तेवर तल्ख होते दिख रहे हैं। आने वाले समय में पानी की मांग बढ़ने की उम्मीद जतायी जा रही है। बिना किसी कार्ययोजना के ही चल रही पानी की सप्लाई से लोग संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।

पालिका के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सिवनी शहर में पानी की टंकियों की तादाद अभी तक नहीं बढ़ायी गयी है। कहने को अशोक नगर, मठ मंदिर, हड्डी गोदाम में पानी की टंकिया स्वीकृत हैं। इसके अलावा बिना सोचे समझे ही कबीर वार्ड में एक पानी की टंकी का प्रस्ताव दे दिया गया था।

बाद में जब पता चला कि पिछली परिषद के द्वारा कबीर वार्ड के लिये बनायी गयी पानी की टंकी ही अभी तक प्यासी है तब जाकर इस टंकी के प्रस्ताव को हटाया गया। सिवनी में पहले टिग्गा मोहल्ले की इकलौती पानी की टंकी से दिन में दो बार पानी का प्रदाय किया जाता था। अस्सी के दशक तक लोग इस टंकी से पानी लेकर संतुष्ट रहा करते थे।

कालांतर में सिवनी में बरघाट नाका, छिंदवाड़ा नाका, सर्किट हाऊस के पास के साथ ही साथ टिग्गा मोहल्ला वाली पुरानी पानी की टंकी से पानी प्रदाय किया जा रहा है। इसके अलावा बारापत्थर के कुछ क्षेत्र को बबरिया से पानी प्रदाय किया जा रहा है। उधर, डूंडा सिवनी के लिये पानी की टंकी में पानी कहां से भरा जायेगा यह भी शोध का ही विषय बना हुआ है।

सूत्रों का कहना है कि बढ़ी आबादी को देखकर पालिका प्रशासन को पहले पानी की टंकियों की तादाद बढ़ाना चाहिये था, उसके बाद ही नये कनेक्शन्स को हरी झंडी देना था। बताया जाता है कि जिसने भी पालिका के कारिंदों की मुट्ठी गर्म की उसे नल का कनेक्शन दे दिया गया। नलों के कनेक्शन रेवड़ियों जैसे बांट दिये गये जिसकी परिणिति आज कम दबाव के पानी का नलों द्वारा उगलना ही माना जायेगा।

लोगों का कहना है कि कुछ सालों पहले तक नलों में पानी का दबाव इतना ज्यादा रहता था कि पानी पहली मंजिल तक भी बिना मोटर या टुल्लू पंप के पहुंच जाता था। आज आलम यह है कि दो से छः फीट के गड्ढे करने के बाद भी नल रोते हुए ही आते हैं, वह भी महीने में अक्सर ही लाईन फूट जाने से गायब हो जाते हैं।



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