खुश होने का बहाना है, बुढ़ापा रोकने का खयाल

(मुकुल व्यास)

यह जानते हुए कि वृद्ध होने की प्रक्रिया जीवन का एक कुदरती हिस्सा है, लोगों ने इसे रोकने के प्रयास बंद नहीं किए हैं। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के रिसर्चरों के अनुसार वृद्धावस्था रोकने के सारे प्रयास निरर्थक हैं क्योंकि मनुष्य जैसे बहुकोशिकीय जीवों में बुढ़ापे की प्रक्रिया यानी एजिंग को रोकना मुमकिन नहीं है। यूनिवर्सिटी में इकोलजी की प्रफेसर जोएना मासेल का मानना है कि एजिंग अनिवार्य है। इससे बचने का कोई तार्किक, सैद्धांतिक और गणितीय समाधान नहीं है। मासेल और उनके सहयोगी रिसर्चर पॉल नेल्सन ने एजिंग के गणित पर अपने निष्कर्ष प्रॉसीडिंग्स ऑफ द नेशनल अकैडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन में प्रस्तुत किए हैं।

एजिंग के विकास क्रम के बारे में वर्तमान समझदारी के अनुसार, इसे तभी रोका जा सकता है जब कोशिकाएं स्पर्धा कर एजिंग से जुड़ी सुस्त कोशिकाओं को हटा दें और स्वस्थ कोशिकाओं को बरकरार रखें। मगर ये दोनों काम एक साथ करना व्यवहार में असंभव सरीखा है। शरीर में बुढ़ापे की प्रक्रिया आरंभ होने पर कोशिका के स्तर पर दो चीजें होती हैं। एक तो कोशिकाएं मंद पड़ जाती हैं और अपना काम बंद कर देती हैं। यहां केश कोशिकाओं का उदाहरण दिया जा सकता है जो पिग्मेंट बनाना बंद कर देती हैं। एजिंग की प्रक्रिया में दूसरी चीज यह होती है कि कुछ कोशिकाएं अपनी विकास दर तेज कर लेती हैं। इससे कैंसर कोशिकाएं बन सकती हैं। रिसर्चरों के अनुसार जैसे-जैसे आयु बढ़ती है, शरीर के भीतर कैंसर कोशिकाएं बढ़ने लगती हैं, भले ही उनके लक्षण दिखाई न दें।

अधिकांश कोशिकाओं का सुस्त पड़ना और कुछ कोशिकाओं का तेजी से बढ़ने लगना- अजीबोगरीब स्थिति है। आप सुस्त कोशिकाओं से छुटकारा पाते हैं तो कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने का अवसर मिल जाता है और कैंसर कोशिकाओं से छुटकारा पा लेते हैं या उनकी वृद्धि को धीमा कर देते हैं तो सुस्त कोशिकाओं को जमा होने का मौका मिल जाता है।

अब रिसर्चरों ने एक गणितीय इक्वेशन रखी है जो यह बताती है कि एजिंग एक अनिवार्य सत्य क्यों है। यह बहुकोशिकीय जीव होने का स्वाभाविक गुण है। मासेल ने साफ-साफ कहा, प्राकृतिक चयन या किसी और तरीके से भी इसे रोकना मुमकिन नहीं है। गणित यह कहता है कि समय के साथ चीजें बिखरने लगती हैं। उनको ठीक करने की कोशिश से चीजें और बदतर होने लगती हैं। आप एक समस्या का समाधान खोजेंगे तो दूसरी में उलझ जाएंगे। बुनियादी बात यह है कि चीजें अंततः विखंडित होंगी, भले ही आप उनको विखंडित होने से रोकने के लिए भरपूर जोर लगा लें। यदि आपको बहुकोशिकीय जीव बने रहना है तो बुढ़ापे की प्रक्रिया को झेलना ही पड़ेगा।

इस बीच, एजिंग पर एक दूसरी रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि उम्र के साथ-साथ हमारे क्रोमोसोम (गुणसूत्र) भी बूढ़े होने लगते हैं। क्रोमोसोम निर्देश-पुस्तिकाओं की तरह होते हैं। वे हमें बताते हैं कि जिंदा रहने के लिए आवश्यक प्रोटीन किस तरह निर्मित किए जाने चाहिए। क्रोमोसोम डीएनए के लंबे हार जैसे हैं जो हमारे शरीर की प्रत्येक कोशिका में कुंडली के आकार में मौजूद होते हैं। हार के कुछ हिस्से खुले और ढीले होते हैं जबकि कुछ अन्य हिस्से कसे हुए गुच्छों जैसे होते हैं या छिपे हुए होते हैं। यदि कोई हिस्सा कसे हुए गुच्छे जैसा होता है तो कोशिका की मशीनरी के लिए उस हिस्से में डीएनए तक पहुंचना और जरूरी जीनों को सक्रिय करना मुश्किल हो जाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ कनेक्टिकट के वैज्ञानिकों द्वारा की गई नई रिसर्च के मुताबिक क्रोमोसोम हमारे साथ-साथ ही बूढ़े होते हैं। इन क्रोमोसोम में कुछ हिस्सों के घुंघराले होने से और बंद होने से डीएनए तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। यह डीएनए रोगों से शरीर की रक्षा के लिए आवश्यक होता है। युवा लोगों में हजारों स्थान खुले होते हैं जो जीनों को सक्रिय करना और प्रोटीन निर्मित करना आसान बनाए रखते हैं। युवा लोगों में अधिक सक्रिय दिखने वाले जीन बूढ़े लोगों में अपनी सक्रियता खो देते हैं।

(साई फीचर्स)


डिसक्लेमर : ऊपर व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया इसका समर्थन या विरोध नहीं कराती है।

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