गणित पर पतह

वह गणित में बहुत कमजोर था। इसकी वजह से उसके सहपाठी और अध्यापक उसे बुद्धू समझते थे। उसके साथी उसके कोट के पीछे बुद्धू लिखी पर्ची चिपका देते थे और फिर सभी उसकी हंसी उड़ाया करते थे। सहपाठियों का ऐसा करना उसे अच्छा नहीं लगता था। वह अपने सहपाठियों से कहता, माना कि मैं गणित में कमजोर हूं, किंतु इसका यह अर्थ तो नहीं कि तुम सब मिलकर मेरा इस तरह मजाक उड़ाओ।

लेकिन विरोध करने पर सहपाठी और दूने वेग से उसका मजाक उड़ाते। जब उससे सहन न हुआ तो उसने एक-दो लड़कों के साथ लड़ाई-झगड़ा भी किया, अपने अध्यापकों से उनकी शिकायत भी की। चुप रहने और कक्षा में पीछे बैठने की वजह से अध्यापक उसकी शिकायत पर कोई ध्यान नहीं देते थे। एक दिन तो कक्षा में एक अध्यापक ने भी उस पर व्यंग्य कसते हुए कहा, यह बुद्धू और किसी विषय में तो फिर भी पास हो सकता है, लेकिन गणित में तो सात जन्मों में भी सफल नहीं हो सकता।

(साई फीचर्स)



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