गैंगरेप पर सियासी सन्नाटा!

(शरद खरे)

जिला मुख्यालय में महज 14 साल की एक नाबालिग बाला के साथ गैंगरेप की घटना के प्रकाश में आने के दस दिनों बाद भी सिवनी के सियासी नेताओं सहित महिलाओं की चिंता करने वाले एवं अन्य गैर राजनैतिक संगठनों की चुप्पी अपने आप में आश्चर्य जनक ही मानी जा सकती है।

25 नवंबर को 14 साल की एक बालिका के साथ गैंगरेप हुआ। 26 नवंबर को उसने पुलिस में (हालांकि कुछ लोगों का दावा है कि उनके द्वारा रिपोर्ट दर्ज करवायी गयी) रिपोर्ट दर्ज करायी। इसके बाद दो पारियों में दस लोगों को पुलिस ने अपना मेहमान बनाया। यह सब कुछ जिले के मीडिया में प्रकाशित और प्रसारित होने के बाद भी गैंगरेप पीड़िता के लिये संवेदनाओं के दो शब्द कहने में भी सियासी दल सहित अन्य संगठनों को गुरेज ही दिख रहा है।

सिवनी में दो-तीन दशकों से एक अज़ीब परंपरा का आगाज हुआ है। सियासी दलों सहित गैर राजनैतिक संगठनों के द्वारा स्थानीय मामलों को दरकिनार कर देश और प्रदेश में हो रही घटनाओं पर चीत्कार किया जा रहा है। यह सिवनी के विकास या अन्य मसलों पर शुभ संकेत कतई नहीं माना जा सकता है।

सिवनी में देह व्यापार पर भी सभी ने मानों आँखें मूंद रखीं हैं। कुछ साल पहले विजयादशमीं की रात्रि में युवा एवं उत्साही अधिवक्ता अजय बाबा पाण्डेय के द्वारा पॉश कॉलोनी बारापत्थर में देह व्यापार कर रहीं कुछ महिलाओं को पुलिस के हवाले किया गया था। इसके बाद भी जिले में देह व्यापार की खबरें जब-तब मिल जाया करती हैं।

पुलिस के द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार इस मामले में तीन महिलाओं जिनमें से दो महिलाएं सिवनी की ही निवासी हैं के द्वारा उक्त पीड़िता को इन आताताईयों के सामने प्रस्तुत किया गया था। यह वाकई घृणित कार्य की श्रेणी में आने वाला काम है। नाबालिग बालिका के साथ इस तरह का दुराचार जघन्य अपराध की श्रेणी में ही रखा जाना चाहिये।

आश्चर्य इस बात पर है कि सिवनी के निर्दलीय विधायक दिनेश राय के द्वारा तो विधानसभा में इस बात को उठाया गया, किन्तु काँग्रेस के पास शिवराज सरकार को घेरने का यह नायाब मौका जिले के दोनों काँग्रेसी विधायक रजनीश हरवंश सिंह और योगेंद्र सिंह के द्वारा गंवा दिया गया। भोपाल में हुए गैंगरेप के मामले में चीख-चीख कर आसमान सिर पर उठा लेने वाले विधायकों के द्वारा सिवनी जिले की (जो कि उनकी कर्मभूमि है) इस घटना पर प्रलाप करने का अवसर शायद नहीं मिला।

देश में अगर कहीं और इस तरह की घटना हुई होती तो शायद सिवनी के विज्ञप्तिवीरों के द्वारा अब तक न जाने कितने गोले दाग दिये जाते। इस तरह की घटना की सभी को निंदा करना चाहिये पर सिवनी में स्थानीय मामले शायद अब गौड़ हो चुके हैं। लगता है कि देश में कहीं राम राज्य है तो वह सिवनी में ही है। ऐसा कहने का आधार महज इतना ही है कि जिले के नेताओं को जिले में चरमराती सरकारी व्यवस्थाएं दिखायी नहीं दे रहीं हैं।

लोगों के बीच चर्चाओं में बने रहने के लिये नेताओं द्वारा देश-प्रदेश की चिंता कर अपने कर्त्तव्यों की इतिश्री की जा रही है। इससे जिले को कुछ लाभ हो या न हो पर एक फायदा जरूर नजर आ रहा है और वह यह कि लोकल अव्यवस्थाओं को नजर अंदाज कर लोग एक दूसरे से भाईचारा निभा पा रहे हैं और खबरों में भी बने हुए हैं . . .!



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