ग्राम सभा को मिनी संसद बता बरगलाया जा रहा आदिवासियों को!

कितनी संवैधानिक हैं परंपरागत ग्राम सभाएं . . . 02

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। जिले में आदिवासियों को भरमाकर उनके सामने संविधान की गलत व्याख्या की जाने की बातें प्रकाश में आ रही हैं। जिले की आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील में पाँचवी अनुसूची में उल्लेखित बातों की व्याख्या कुछ लोगों के द्वारा अपने हिसाब से की जा रही है।

घंसौर तहसील में चल रहीं चर्चाओं पर अगर यकीन किया जाये तो पाँचवी अनुसूची को लेकर आदिवासियों को जमकर बरगलाया जा रहा है। कुछ अवांछित तत्वों के द्वारा इसकी व्याख्या कर सोशल मीडिया व्हाट्स एप पर भी संदेशों को वायरल किया जा रहा है।

घंसौर थाना सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस तरह के संदेशों की जानकारी पुलिस को भी प्राप्त हुई है। सूत्रों ने कहा कि इस तरह के संदेशों में कहा जा रहा है कि अनूसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों की सरकार होगी, जिसमें मिनी संसद (मिनी संसद ग्राम सभा को कहते हैं) वह अपने फैसले लेगी और कानून बनायेगी। पाँचवीं अनुसूची में दर्ज क्षेत्रों में देश की विधानसभा और लोकसभा के द्वारा बनाये गये आम कानून आदिवासियों पर लागू न होने की बात भी इसमें कही जा रही है।

सूत्रों की मानें तो इस तरह के चल रहे संदेशों में कहा जा रहा है कि आदिवासी समाज के विकास के लिये शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य आदि की जानकारी तीन या छः माह अथवा जब देश के राष्ट्रपति चाहें तब भेजी जायेगी। इसके अलावा आदिवासी क्षेत्रों में शासन प्रशासन पर आदिवासियों के नियंत्रण की बात भी कही जा रही है।

इसके साथ ही सूत्रों ने बताया कि इस तरह के वायरल हो रहे संदेशों में यह भी कहा जा रहा है कि इन क्षेत्रों में लेन-देन (बैंक) एवं व्यापार का काम सिर्फ आदिवासियों के हाथ में ही होगा। गैर आदिवासी समाज के लोग अनुसूचित क्षेत्रों में व्यापार नहीं कर सकते हैं। इस तरह की बातों से आदिवासियों को जमकर भरमाया जा रहा है।

सूत्रों ने बताया कि सोशल मीडिया पर चल रहे संदेशों के अनुसार पाँचवी अनुसूची की व्याख्या मनमुताबिक की जा रही है। इसके अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समाज के विद्यार्थियों की शिक्षा किस भाषा में होगी.. यह बात भी उस क्षेत्र में निवास करने वाले आदिवासियों के द्वारा तय की जायेगी।

इसी तरह सूत्रों ने आगे बताया कि इस तरह के संदेशों में यह भी कहा जा रहा है कि पाँचवीं अनुसूची के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों में शराब के ठेेके और शराब दुकान नहीं खुल सकती हैं। इसके अलावा पाँचवी अनुसूची में शत प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था है। चपरासी से लेकर कलेक्टर तक अधिकारी सिर्फ आदिवासी ही रहेंगे।

(क्रमशः जारी)



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