घर लौटें और देश बनाएं

अमेरिका अपने उत्कृष्ट विश्वविद्यालयों के कारण आकर्षण का केंद्र रहा है। दुनिया का शायद ही कोई देश हो, जहां के छात्र वहां से पढ़कर अपनी मंजिल न तय करते हों। इसके महत्वपूर्ण शोध, अलग सोच और बहु-अनुशासनात्मक शिक्षा प्रणाली किसी भी विदेशी छात्र को उसकी उच्चतम क्षमता तक पहुंचाने में मददगार बनती है।

बांग्लादेश के 7,000 से भी ज्यादा छात्र इन दिनों अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे हैं, जो पिछले वर्ष से दस प्रतिशत ज्यादा हैं। लेकिन यह तब तक बहुत खुश होने का कारण नहीं, जब तक हम यह न जान लें कि बहु-उपयोगी ज्ञान लेकर कितने छात्र स्वदेश लौटते हैं? यानी बांग्लादेश को उनकी मेधा का कितना लाभ मिलता है?

सोचना होगा कि बड़ी संख्या में हमारी मेधा वहां जा रही है, पर लौट नहीं रही, तो यह बड़ा नुकसान है। यही प्रतिभा पलायन है। मगर ऐसा होना नहीं चाहिए। चीन की सरकार अमेरिका जाकर अध्ययन के लिए अपने छात्रों को प्रोत्साहित करती है, पर वहां से बड़ी तादाद में छात्र चीन लौटते हैं, क्योंकि अपने देश में उन्हें रोजगार की अपार संभावनाएं दिखती हैं, जहां उनकी मेधा का बेहतर इस्तेमाल होता है।

चीन के विकास का यह बड़ा राज है। बांग्लादेश इस मामले में फिसड्डी है। यहां विकास की गति काफी धीमी है और युवाओं के लिए वैसी संभावनाएं भी नहीं दिखती हैं। हमें इस दिशा में तेजी से काम करना होगा। कुछ इस तरह, जैसा पहले न हुआ हो। देश को आगे ले जाने के लिए यह बहुत जरूरी है। मगर यह कहना मात्र काफी नहीं। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा, युवाओं को आश्वस्त करना होगा कि देश में ही उनकी क्षमताओं का इस्तेमाल करने के अनुकूल अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

दूसरे शब्दों में, उन्हें वापस लौटने को प्रोत्साहित करने वाले हालात पैदा करने होंगे। दुर्भाग्यवश हमने अभी तक ऐसा कुछ नहीं किया। इधर नॉर्थ-साउथ यूनिवर्सिटी के एक शिक्षक के अचानक लापता होने से सवाल उठ रहे हैं कि हम अपनी प्रतिभाओं को संभाल नहीं पा रहे, उन्हें अनुकूल माहौल नहीं दे पा रहे। कई बार तो प्रताड़ित होकर वे आत्महत्या तक कर ले रहे हैं। यदि यही माहौल रहा, तो कुछ नया सोचना भी मुश्किल हो जाएगा। (ढाका ट्रिब्यून, बांग्लादेश से साभार)

(साई फीचर्स)



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