चार ग्रहों के दुर्लभ योग में आ रही मकर संक्राति

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। मकर संक्राति पर्व की शास्त्रों में विशेष महत्ता बतायी गयी है। इस दिन सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। सूर्य उत्तरायण होते हैं। कई दुर्लभ संयोंगों के कारण इस बार की मकर संक्राति और भी विशेष बन गयी है।

ज्योतिषाचार्यो के अनुसार मकर संक्राति पर्व पर बेहद दुर्लभ चतुर्ग्ही योग बनेगा, जो 10 फरवरी तक रहेगा। इस योग में सूर्यदेव और शनि ग्रह एक राशि में रहेंगे। ज्योर्तिविदों के अनुसार ग्रहों के इस योग से मौसम का असंतुलन, सेहत और फसलों को नुकसान पहुँचने की संभावना है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार संक्राति से उत्तरायण हो रहे सूर्यदेव को अर्घ्य देने और अनुष्ठान करने से अशुभ प्रभाव कम होगा।

विशेष पुण्यकाल 15 को

मकर संक्राति पर्व पर सूर्यदेव 14 जनवरी को रात 08ः07 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जबकि 15 जनवरी को सूर्याेदय से मध्याह्न काल तक मकर संक्राति का विशेष पुण्यकाल रहेगा। सूर्य के उत्तरायण होने के साथ सूर्य, शुक्र और शनि ग्रह एक राशि में आयेंगे। 27 जनवरी को बुध भी इसी राशि में प्रवेश करेगा। सूर्य के उत्तरायण होने के बाद मांगलिक कार्य आरंभ होंगे। हालांकि, गुरु और शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण विवाह के मुहूर्त 08 फरवरी से आरंभ होंगे।

राशियों पर प्रभाव

ज्योतिषियों के अनुसार इस योग में मेष, मिथुन, कन्या, मकर, वृश्चिक, मीन के जातकों पर शुभ प्रभाव पड़ेगा। हालांकि यह योग कुम्भ, धनु, तुला राशि के जातकों पर अशुभ प्रभाव डालेगा जबकि, वृष, कर्क एवं सिंह राशि के लिये सामान्य प्रभाव रहेगा। वैसे अधिकांश जातकों को सूर्य पूजन से लाभ ही मिलेगा। ज्योर्तिविदों के अनुसार ग्रहों के इस योग से मौसम का असंतुलन, सेहत और फसलों को नुकसान पहुँचने की संभावना है। ज्योर्तिविदों के अनुसार संक्राति से उत्तरायण हो रहे सूर्यदेव को अर्घ्य देने और अनुष्ठान करने से अशुभ प्रभाव कम होगा।

ये उपाय करें

ज्योर्तिविदों के अनुसार जिन राशि के जातकों पर चतुर्ग्रही योग का प्रभाव पड़ रहा है, उन्हें सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही गायत्री मंत्र का जप, कम्बल एवं तिल गुण का दान करना चाहिये।



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