चौड़ी सड़क या तंग गलियां!

(शरद खरे)

नगर पालिका परिषद के द्वारा बीते पखवाड़े आरंभ कराये गये अतिक्रमण विरोध अभियान को मानो थाम दिया गया है। कुछ समय के अंतराल के बाद नगर पालिका परिषद के द्वारा संभवतः नागरिकों के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के उद्देश्य से अतिक्रमण विरोधी चलाया जाता है वह भी दो या तीन दिनों के लिये, उसके बाद इस अतिक्रमण विरोधी अभियान को ठण्डे बस्ते के हवाले कर दिया जाता है।

याद पड़ता है कि 1992 में तत्कालीन जिला कलेक्टर पुखराज मारू के द्वारा अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया था। यह अभियान निरंतर चला था। इसके बाद से लगभग डेढ़ पखवाड़े से अतिक्रमण के खिलाफ चलने वाली कार्यवाही कितने दिन और कब-कब चली इस बात से शहर की जनता भली-भांति परिचित है।

शहर में रात को चौड़ी दिखने वाली सपाट सड़कें आखिर दिन में तंग गलियों में कैसे तब्दील हो जाती हैं! जाहिर है दिन के उजाले में ही गलत काम हो रहे हैं। दरअसल, नगर पालिका परिषद में अब तक पदस्थ रहे अधिकारियों और चुने हुए प्रतिनिधियों की कथित अनदेखी का ही परिणाम है कि जिला मुख्यालय में अतिक्रमण का कैंसर अब पूरी तरह फैल चुका है।

सिवनी शहर को लोग शटर्स का शहर भी कहने लगे हैं। सिवनी शहर में कमोबेश हर घर में एक शटर दिख जाती है। सिवनी के अतिक्रमण और यहाँ की दुकानों पर अगर कोई शोध (पीएचडी) कर ले तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिये। पता नहीं बिना पार्किंग या फुटपाथ को छोड़े हुए नगर पालिका के द्वारा इस तरह भवन या प्रतिष्ठान के निर्माण की अनुमति कैसे दी जाती रही है?

जिले के प्रशासनिक मुखिया अगर स्वयं एक बार दोपहर के समय दो पहिया वाहन पर बैठकर शहर का भ्रमण कर लें तो उनके सामने शहर की दुरावस्था आ जायेगी। शहर में बैंक, कार्यालय या दुकानों में पार्किंग नहीं है, जिसके चलते यहाँ आने वाले लोग अपने वाहन सड़कों पर ही खड़े करने पर मजबूर हैं।

मुख्य नगर पालिका अधिकारी नवनीत पाण्डेय को चाहिये कि वे शहर के जिम्मेदार नागरिकों के साथ बैठकर शहर को सुव्यवस्थित करने के लिये रोडमेप तैयार करें। उन्हें यह नहीं भूलना चाहिये कि वे जो कुछ भी कर रहे हैं वह शहर के वाशिंदों की बेहतरी के लिये ही कर रहे हैं।

शहर की बेहतरी किसमें है यह बात शहर का वाशिंदा ही जान सकता है। बाहर से आकर एक दो या तीन साल पदस्थ रहने वाले अधिकारियों को शहर की जरूरतें, भौगोलिक स्थितियों सहित अन्य मुद्दों को समझने में लंबा समय लग सकता है। इसके बाद जब वे शहर के विकास का रोड मेप तैयार कर अमली जामा पहनाने का प्रयास करते हैं तब तक उनका तबादला ही हो जाता है। इस तरह से शहर का विकास किस तरह हो सकेगा!

संवेदनशील जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड से जनापेक्षा है कि शहर की तंग गलियां वास्तव में कितनी चौड़ी हैं, इन पर कितना अतिक्रमण है, इस बारे में वास्तविक तथ्यों से अवगत होने के उपरांत नगर पालिका परिषद को इस बात के लिये पाबंद किया जाये कि शहर की सड़कें अपने मूल स्वरूप में आ जायें और आवागमन सुव्यवस्थित हो सके।



0 Views

Related News

(शरद खरे) शहर में दोपहिया नहीं बल्कि अब चार पहिया वाहन भी जहरीला धुंआ उगलने लगे हैं। बताया जा रहा.
पीडब्ल्यूडी की टैस्टिंग लैब . . . 02 मोबाईल प्रयोगशाला के जरिये हो रहे वारे न्यारे (अखिलेश दुबे) सिवनी (साई)।.
मासूम जान्हवी की मदद के लिये उठे सैकड़ों हाथ पर रजनीश ने किया किनारा! (फैयाज खान) छपारा (साई)। केवलारी विधान.
दो शिक्षकों के खिलाफ हुआ मामला दर्ज (सुभाष बकोड़े) घंसौर (साई)। पुलिस थाना घंसौर अंर्तगत जनपद शिक्षा केंद्र घंसौर के.
खनिज अधिकारी निर्देश दे चुके हैं 07 दिसंबर को! (स्पेशल ब्यूरो) सिवनी (साई)। जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड की अध्यक्षता.
(ब्यूरो कार्यालय) सिवनी (साई)। 2017 बीतने को है और 2018 के आने में महज एक पखवाड़े से कुछ अधिक समय.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *