जज विवाद: सवाल उठाने वाले जज गोगोई ने कहा, कोई संकट नहीं

(महुआ दत्‍ता)

कोलकाता (साई)। भारत के प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ चयनात्मकतरीके से मामलों के आवंटन और कुछ न्यायिक आदेशों को लेकर एक तरह से उनके खिलाफ बगावतकरने वाले उच्चतम न्यायालय के 4 वरिष्ठ न्यायाधीशों में से एक न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने शनिवार को कहा कि यह मुद्दा कोई संकट नहीं है। न्यायमूर्ति गोगोई एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए कोलकाता आए थे।

कार्यक्रम के इतर उनसे पूछा गया कि संकट सुलझाने के लिए आगे का क्या रास्ता है, इस पर उन्होंने कहा, ‘कोई संकट नहीं है।यह पूछे जाने पर कि उनका कदम क्या अनुशासन का उल्लंघन है, गोगोई ने यह कहते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, ‘मुझे लखनऊ के लिए एक उड़ान पकड़नी है। मैं बात नहीं कर सकता।उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश राज्य विधिक सेवा प्राधिकारियों के पूर्वी क्षेत्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आए थे।

एक दिन पहले ही आजाद भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने मीडिया के सामने आकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद चारों जजों ने एक चिट्ठी जारी की, जिसमें सीजेआई की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

इसके बाद से ही बार के स्तर पर सुलह की कोशिशें चल रही हैं। सरकार ने पूरे मसले को न्यायपालिका का अंदरूनी मामला बताकर दखल देने से इनकार किया है लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीएम के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र ने शनिवार को सीजेआई से मुलाकात की कोशिश की। हालांकि यह मुलाकात नहीं हो पाई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र करीब 5 मिनट तक चीफ जस्टिस के आवास के बाहर खड़े रहे, लेकिन मीटिंग नहीं हो सकी।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने शनिवार शाम करीब 5 बजे एक अहम बैठक की। बैठक के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन मिश्रा ने कहा कि एक मत से फैसला किया गया है कि उनका 7 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल कल सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों से मिलेगा। इसके लिए जजों से समय लिया जा रहा है। 50 प्रतिशत जजों ने सहमति दे दी है और जल्द ही जो अभी बाहर हैं उनके सहित बाकियों से भी सहमति ले ली जाएगी। उन्होंने कहा कि रविवार सुबह 9 बजे से प्रतिनिधिमंडल बातचीत शुरू कर देगा। दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन ने भी शनिवार को आपात बैठक की और विवाद को जल्द सुलझाने की मांग की। असोसिएशन ने 2 प्रस्ताव पारित कर मांग की कि विवादित मसलों पर सुप्रीम कोर्ट के सभी जज विचार करें और जनहित याचिकाओं की सुनवाई या तो सीजेआई या कलीजिअम में शामिल बाकी के 4 जज ही करें।



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