जब पंडित नेहरू के पिताजी ने समय से नहीं भरा जल कर

बात उस वक्त की है जब जवाहरलाल नेहरू इलाहाबाद म्युनिसिपैलिटी के चेयरमैन थे। एक दिन वह कार्यालय में फाइलें देख रहे थे। उसी समय जल कर विभाग को संभालने वाले अधिकारी उनके पास आए। थोड़ी देर तक तो वह अधिकारी पंडितजी से इधर-उधर की बातें करते रहे, फिर बड़े संकोच से बोले- पंडित जी, मैं एक फाइल की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। यह उन व्यक्तियों से संबंधित फाइल है, जिन्होंने अभी तक जल कर जमा नहीं कराया है। इसके लिए उन्हें कई बार कहा भी जा चुका है, लेकिन वे लोग पानी का टैक्स भरते ही नहीं।

पंडित नेहरू ने कहा, इसमें संकोच की क्या बात है? जिन्होंने जल कर नहीं जमा कराया है उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। लाइए फाइल मुझे दीजिए, मैं खुद कार्रवाई किए जाने की अनुशंसा करता हूं। अधिकारी ने फाइल देते हुए कहा, इसमें आपके पिताजी का भी नाम है। पंडित नेहरू ने यह सुनकर सहज भाव से फाइल का अध्ययन किया। नेहरूजी ने देखा कि कई संभ्रांत लोगों ने जल कर के पैसे जमा नहीं कराए हैं। इस फाइल में अनुशंसा है कि जिन लोगों ने जल कर के पैसे नहीं जमा कराए हैं, उनकी जल आपूर्ति बंद कर दी जाए। पंडित नेहरू ने कहा, कानून सभी के लिए बराबर है।

उन सभी घरों की जल आपूर्ति बंद कर दी गई। शाम को जब नेहरू घर पहुंचे तो देखा कि घर में पीने का पानी नहीं है और पिता मोतीलाल नेहरू क्रोध से बरामदे में टहल रहे हैं। नेहरूजी को देखते ही बोले, यह क्या किया जवाहर? अपने ही घर के पानी की लाइन कटवा दी? पंडितजी ने कहा, बकाया पैसे जमा करा दो, अभी लाइन मिल जाएगी। पुत्र की कर्तव्यनिष्ठा देखकर पिता का क्रोध शांत हो गया और उन्होंने तुरंत पानी पर लगने वाले टैक्स के बकाया पैसे जमा करवा दिए।

(साई फीचर्स)



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