जलावर्धन योजना पर पालिका मौन!

पालिका के लिये कामधेनु बनी जलावर्धन योजना

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। नवीन जलावर्धन योजना का काम पूरा करने के लिये भाजपा शासित नगर पालिका परिषद के द्वारा ठेकेदार को दी गयी आठ माह की मियाद पूरी हुए एक लंबा समय हो गया है। कार्यादेश जारी होने के बाद तीन साल पूरे होने को आ रहे हैं और ठेकेदार के द्वारा अब तक काम पूरा नहीं किया गया है। इसके बाद भी पालिका प्रशासन इस तरह बैठा है मानो कुछ हुआ ही नहीं है।

ज्ञातव्य है कि शहर में नवीन जलावर्धन योजना के तहत भूमिगत पाईप लाईन डालने का काम लगभग एक साल से ज्यादा समय से जारी है। ठेकेदार के द्वारा पालिका के तकनीकि अमले के बिना ही मनमाने तरीके से डाली जा रही पाईप लाईन में न तो पाईप लाईन के नीचे मुरम का कुशन दिया जा रहा है और न ही ऊपर मुरम डाली जा रही है।

लोगों का आरोप है कि ठेकेदार के द्वारा पूरे शहर को खोदकर रख दिया गया है। पाईप लाईन डालने के बाद ठेकेदार के द्वारा खोदे गये स्थानों पर मिट्टी के टीले बना दिये गये हैं। इन स्थानों को समतल न किये जाने से रोज ही दुर्घटनाएं भी घट रहीं हैं। इस मामले में न तो चुनी हुई परिषद ही कुछ करती दिख रही है और न ही पालिका प्रशासन ही इस ओर ध्यान दे रहा है।

इसके साथ ही लोगों का कहना है कि इस तरह पालिका प्रशासन के द्वारा परोक्ष तौर पर जलावर्धन योजना के ठेकेदार को लाभ पहुँचाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि इस मामले में जब पालिका के तकनीकि अमले से पूछा जाता है तो तकनीकि अमला भी ठेकेदार के कारिंदों की तरह ही यह जवाब देता नजर आता है कि जब शहर में पाईप लाईन का जाल बिछ जायेगा और उसमें पानी के दबाव का परीक्षण हो जायेगा उसके बाद ही ठेकेदार के द्वारा खोदे गये स्थानों को समतल किया जायेगा।

लोगों का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के घरों, प्रतिष्ठानों, कार्यालयों आदि के सामने जलावर्धन योजना के ठेकेदार के द्वारा पाईप लाईन डालने के बाद न केवल समतलीकरण कर दिया गया है वरन वहाँ सीमेंट कांक्रीट भी कर दिया गया है। शेष स्थानों से मानो ठेकेदार को कोई सरोकार ही नहीं है।

इसी तरह लोगों का कहना है कि यह कहा जा रहा है कि निविदा की शर्तों और कार्यादेश में यह बात स्पष्ट तौर पर उल्लेखित की गयी है कि पाईप लाईन डालने के बाद ठेकेदार के द्वारा उस स्थान को यथावत स्थिति में लाया जायेगा। ठेकेदार के द्वारा की जा रही अनियमितताओं के मामले में पालिका प्रशासन ने भी मौन साधे रखा है।

नवीन जलावर्धन योजना के लिये 30 मार्च 2015 को जारी कार्यादेश में ठेकेदार को यह कार्य आठ माह में पूरा किये जाने के लिये पाबंद किया गया था। इसके बाद गुपचुप तरीके से 05 मार्च 2016 तक के लिये यह अवधि बढ़ा दी गयी थी। उसके बाद यही अवधि 30 जुलाई 2017 तक के लिये बढ़ायी गयी थी। इसके बाद अब तक ठेकेदार को कार्य करने के लिये अतिरिक्त अवधि प्रदाय नहीं की गयी है।

नगर पालिका के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस लिहाज से 30 जुलाई के उपरांत के बचे कार्य पर ठेकेदार को पेनाल्टी लगायी जाना चाहिये, किन्तु ठेकेदार के द्वारा कथित तौर पर उपकृत पालिका के चुने हुए प्रतिनिधियों और अधिकारी एवं कर्मचारियों के द्वारा जनवरी 2018 में ठेकेदार को कार्य करने की अवधि को छः माह पूर्व से बढ़ाये जाने का ताना – बाना बुना जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि नियमानुसार नगर पालिका को शहर के नागरिकों के लिये जवाबदेह होना चाहिये एवं पालिका प्रशासन के द्वारा ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी करके उससे पूछा जाना चाहिये कि उसके द्वारा निश्चित समयावधि में काम पूरा क्यों नहीं किया गया एवं निविदा एवं कार्यादेश की शर्तों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है। देखा जाये तो ठेकेदार के द्वारा आधे अधूरे एवं बेतरतीब काम से हो रहीं दुर्घटनाओं के लिये पालिका प्रशासन को ठेकेदार के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करवायी जाना चाहिये।



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