जिले में असुरक्षित हैं छात्राएं!

(शरद खरे)

जिले के ग्रामीण अंचलों में उच्च शिक्षा के लिये पर्याप्त सुविधाएं न हो पाने के चलते जिले भर के स्कूल और कॉलेज की छात्राओं को जिला मुख्यालय में आकर ही उच्च शिक्षा लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। लखनादौन, केवलारी, बरघाट जैसे शहरों में महाविद्यालय संचालित हैं पर स्थान सीमित होने के कारण जिले की बालाओं को जिला मुख्यालय की ओर रूख करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। यह वहाँ के स्थानीय जनप्रतिनिधियों के लिये शर्मनाक ही माना जायेगा।

इसके अलावा निज़ि महाविद्यालय और विद्यालय भी जिला मुख्यालय में ही ज्यादा हैं। सरकारी कॉलेज़ में स्थान भरे जाने के बाद बालाओं के पास निज़ि महाविद्यालय जाने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं बचता है। जिला मुख्यालय के अलावा अन्य स्थानों पर निज़ि महाविद्यालय के संचालक अपने महाविद्यालय नहीं खोलना चाहते। इसका सबसे बड़ा कारण ग्रामीण अंचलों या तहसील स्तर पर सुविधाओं का अभाव ही माना जायेगा। सुविधा विहीन तहसील मुख्यालयों में शिक्षकों की समस्या सबसे बड़ी उभरकर सामने आती है।

यही कारण है कि जिला मुख्यालय सिवनी में गर्ल्स हॉस्टल्स की बाढ़ सी आ गयी है। नियमानुसार कन्या छात्रावास संचालित करने के पहले प्रशासन को बाकायदा इसकी इत्तेला देना आवश्यक होता है। सिवनी ही शायद प्रदेश का पहला जिला होगा जहाँ बाहर से आकर रहने वाले लोगों के बारे में पुलिस भी ज्यादा दरयाफ्त करना उचित नहीं समझती है।

बताते हैं कि कन्या छात्रावासों के हाल इस कदर बेहाल हैं कि कोठरी जैसे कमरों में बिस्तर लगाकर इन्हें गर्ल्स हॉस्टल में तब्दील कर दिया गया है। गर्ल्स हॉस्टल्स की सूची भी जिला प्रशासन के पास शायद नहीं होगी। मोहल्लों में कुकुरमुत्ते के मानिंद गर्ल्स हॉस्टल्स चल रहे हैं।

इन गर्ल्स हॉस्टल्स में अधीक्षक कौन है? कौन इनकी देखरेख कर रहा है? कहाँ के सुरक्षा कर्मियों के द्वारा इनकी सुरक्षा की जा रही है.. इस मामले में भी शायद ही कोई जानता हो। जिला एवं पुलिस प्रशासन को भी इसकी सुध लेने की फुर्सत नहीं है। गैर राजनैतिक संस्थाएं भी इस मसले पर अपने जबड़े सिले बैठी हैं। गैर राजनैतिक संस्थाओं से जुड़े लोगों की भी अगर इस तरह के हॉस्टल्स के संचालन में भागीदारी हो तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिये।

इन गर्ल्स हॉस्टल्स में साफ पानी, प्रकाश, सुरक्षा आदि की बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। सरकारी स्तर पर जिला मुख्यालय में गर्ल्स हॉस्टल्स उंगलियों में ही गिने जाने वाले हैं। इन गर्ल्स हॉस्टल्स के इर्द-गिर्द दिन रात शोहदों की भीड़ देखी जा सकती है। लोक लाज के चक्कर में छात्राएं भी उनके साथ होने वाली छेड़खानी के बारे में ज्यादा प्रतिकार शायद न कर पाती हों। आगे चलकर ये छेड़छाड़ की घटनाएं ही बड़ा रूप भी ले लिया करती हैं।

अब जबकि राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती लता वानखेड़े की अगुआयी में हुई नीतिगत बैठक में यह निर्देश जारी हुए हैं कि गर्ल्स हॉस्टल में महिला सुरक्षा कर्मी अनिवार्य होगा, के बाद भी जिला प्रशासन के द्वारा अब तक इस दिशा में किसी तरह की पहल नहीं की गयी है।

संवेदनशील जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड से जनापेक्षा है कि जिला मुख्यालय सहित जिले भर में चल रहे कन्या छात्रावासों की सघन जाँच समय सीमा में कर सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं मुहैया करवाने के कड़े निर्देश तत्काल जारी करे ताकि छात्राएं नारकीय छात्रावासों के दंश से बच सकें।



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