जिले में दम तोड़ती स्वास्थ्य सेवाएं

(शरद खरे)

देश को आजाद हुए सात दशक बीत चुके हैं। सियासी तौर पर कभी कद्दावर माना जाने वाला सिवनी जिला अब कमजोर ही नजर आ रहा है। सिवनी में जिस तरह की परंपराओं का चलन पिछले दो ढाई दशकों में चला है उसे देखकर यही लग रहा है मानो जनप्रतिनिधि समय ही काट रहे हैं।

घंसौर क्षेत्र में जिस तरह की घटनाएं प्रकाश में आयी हैं वे वाकई चिंता का विषय हैं। पता नहीं इस मामले में क्षेत्रीय सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और विधायक योगेंद्र सिंह कितने संजीदा हैं, पर इस तरह की घटनाओं पर विचार करने की महती आवश्यकता है। जिला मुख्यालय में तो स्वास्थ्य सुविधाएं सरकारी या निजि तौर पर आसानी से हासिल की जा सकती हैं पर सुदूर ग्रामीण अंचलों के बारे में सोचने की फुर्सत शायद ही किसी के पास बची हो।

घंसौर में एक नवजात को मंडला रेफर किये जाने के दौरान ऑक्सीजन न मिलने से हुई मौत और एक प्रसूता की जननी एक्सप्रेस के न पहुँचने से हुई मौत वर्तमान अराजक व्यवस्थाओं पर अनेक सवालिया निशान खड़े करने के लिये पर्याप्त मानी जा सकती हैं। इस मामले में ज्यादा से ज्यादा क्या होगाा? जाँच की जायेगी, जाँच भी आखिर कितने दिनों में पूरी होगी यह कहा नहीं जा सकता है। जाँच में क्या परिणाम आया यह भी सार्वजनिक शायद ही किया जाये। इस मामले में प्रभारी मंत्री एवं प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री शरद जैन का मौन भी अनेक संदेहों को जन्म देता है।

एक समय था कि सिवनी के सांसद-विधायक इतने ताकतवर हुआ करते थे कि प्रदेश के हुक्मरानों का हाथ पकड़कर उनसे काम कराने का माद्दा वे रखा करते थे। अब स्थितियां बिल्कुल उलट ही नजर आती हैं। कई जनप्रतिनिधि यह कहते भी सुने जाते हैं कि फलां अधिकारी या कर्मचारी हमारी बात ही नहीं सुनता हम क्या करें?

दरअसल, जनप्रतिनिधि यह भूल जाते हैं कि उनके साथ जनता खड़ी है। वे अपने प्रभावों का उपयोग तो करके देखें! सिवनी में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन जैसे पदों पर प्रभारी अधिकारियों की तैनती है। सीएमएचओ के पद पर डॉ.आर.के. श्रीवास्तव के स्थान पर डॉ.मेश्राम का स्थानांतरण आदेश दो माहों पहले जारी हुआ था, पर आदेश में उन्हें पदभार ग्रहण करने के लिये 30 नवंबर के बाद कहा गया था। यह अपने आप में अजीबो गरीब आदेश ही था, पर किसी भी सांसद-विधायक ने इस मामले में आवाज तक नहीं उठायी।

इस तरह के दिल को दहलाने वाले हादसों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी संगठन के साथ ही साथ विपक्ष में बैठी काँग्रेस का मौन भी आश्चर्य जनक ही माना जायेगा। दोनों दलों ने अब तक इस मामले में अपना मौन नहीं तोड़ा है। कोई पार्टी लाईन से हटकर काम नहीं करने की दुहाई देता है तो कोई कुछ और कहता नजर आता है। सब भूल जाते हैं कि वे सबसे पहले सिवनी के निवासी हैं.. किसी राजनैतिक दल के कार्यकर्ता बाद में।

संवेदनशील जिला कलेक्टर से जनापेक्षा है कि कम से कम वे ही राज्य शासन को पत्र लिखकर सिवनी में पूर्णकालिक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा जिला चिकित्सालय में सिविल सर्जन की पदस्थापना की पहल करें।



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