जिले में पिछड़ती काँग्रेस!

(शरद खरे)

2013 के विधानसभा चुनावों में काँग्रेस के द्वारा जिले की चार में से एक की बजाय दो सीटों पर परचम लहरा दिया गया हो किन्तु जिले में काँग्रेस अब पिछड़ती ही दिख रही है। काँग्रेस के हाथ से मण्डला संसदीय क्षेत्र (जिसमें सिवनी जिले की केवलारी और लखनादौन विधानसभा समाहित हैं) भी फिसली है।

2013 के बाद नगर पालिका, नगर पंचायत चुनावों में भी काँग्रेस का प्रदर्शन बहुत ही अच्छा नहीं माना जा सकता है। स्थानीय समस्याओं के मामले में भी काँग्रेस पूरी तरह ही मौन नजर आती है। सिवनी में जिला काँग्रेस के द्वारा जारी होने वाली कमोबेश सभी विज्ञप्तियों को अगर देखा जाये तो या तो काँग्रेस के द्वारा पुण्य तिथि या जयंति मनाये जाने की सूचना या मनाने के उपरांत कार्यक्रम की जानकारी दी जाती है।

काँग्रेस के घोषित और अघोषित प्रवक्ताओं के द्वारा भी स्थानीय समस्याओं को छोड़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान को इस कदर घेरा जाता है मानो नरेंद्र मोदी सिवनी जिले के सांसद और शिवराज सिंह चौहान जिले के विधायक हों। नगर पालिका, जिला पंचायत, जनपद पंचायत के संबंध में काँग्रेस ने अपना मौन नहीं तोड़ा है।

सिवनी नगर पालिका परिषद का ही उदाहरण लिया जाये तो सिवनी नगर पालिका में भ्रष्टाचार चरम पर है। मामला चाहे मॉडल रोड का हो या नवीन जलावर्धन योजना अथवा पुरानी जलावर्धन योजना से गंदे पानी प्रदाय का और या फिर आवारा पशुओं का, हर मामले में काँग्रेस मौन ही नजर आती है।

सिवनी विधानसभा चुनाव लड़ चुके राज कुमार खुराना, बरघाट चुनाव लड़े अर्जुन काकोड़िया मानो चुनाव के उपरांत सुसुप्तावस्था में ही चले गये हैं। सिवनी विधानसभा में निर्दलीय दिनेश राय के द्वारा काँग्रेस को तीसरे नंबर पर ढकेला गया तो बरघाट विधान सभा में भाजपा के कमल मर्सकोले के द्वारा अर्जुन काकोड़िया को पराजित किया गया।

लोकसभा चुनावों में बालाघाट में बोध सिंह भगत ने सुश्री हिना कांवरे को तो मण्डला संसदीय क्षेत्र में फग्गन सिंह कुलस्ते के द्वारा ओमकार सिंह मरकाम को पराजित किया गया था। इसी तरह नगर पालिका में अध्यक्ष पद की उम्मीदवार रहीं काँग्रेस की मानसी पंजवानी ने भी मौन साध रखा है। शहर की जनता कराह रही है। जनता के रिसते घावों पर मरहम लगाने का जतन कोई भी नहीं कर रहा है।

जिन मतदाताओं ने ओमकार सिंह मरकाम, हिना कांवरे, राज कुमार खुराना, अर्जुन काकोड़िया, मानसी पंजवानी पर विश्वास कर अपना मत दिया भी था आज वे इन दोनों की ओर मुँह बाये देख रहे हैं। सवाल यही खड़ा हुआ है कि क्या विजयश्री का वरण करने के बाद ही जनता की सुध ली जायेगी।

काँग्रेस को आज़ाद भारत के प्राचीनतम सियासी संगठन के रूप में पहचाना जाता है। सिवनी जिले में भारतीय जनता पार्टी के द्वारा स्थान-स्थान पर कार्यक्रमों के जरिये अपनी उपस्थिति दर्ज करायी जा रही है, पर काँग्रेस कहीं भी दिखायी नहीं दे रही है। काँग्रेस को इस बारे में विचार करना होगा और जिले की सुध लेना आरंभ करना होगा, अन्यथा आने वाले समय में जनता का जिले में काँग्रेस से मोहभंग हो जाये तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिये।



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