झाड़ियों में छुपे बाघ को देखने उमड़ी भीड़!

आबादी क्षेत्रों में बढ़ रही वन्य जीवों की आवाजाही

(जाहिद शेख)

खवासा (साई)। मध्य प्रदेश – महाराष्ट्र सीमा पर स्थित खावास से टुरिया मार्ग पर नाले में रविवार सुबह एक बाघ दिखायी देते ही लोग यहाँ जुट गये।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाघ को देखने की चाहत में लोग अपनी जान को खतरे में डालकर झाड़ियों के बीच छुपे बैठे बाघ के समीप तक पहुँच गये। भीड़ और शोर शराबे से सहमा बाघ लगभग ढाई घंटे तक झाड़ियों से बाहर नहीं आया। पुलिस, वन विभाग की टीम ने जब लोगों को वहाँ से हटाया तब जाकर बाघ वहाँ से ओझल हो गया।

बताया जाता है कि रविवार को सुबह लगभग साढ़े नौ बजे खवासा से टुरिया मार्ग से गुजर रहे कुछ लोगों ने नाले में बाघ को घूमते हुए देखा। इसके बाद रिसोर्ट के टूरिस्ट, गाईड, जिप्सी ड्राईवर व कर्मचारियों के साथ ग्रामीण भी यहाँ पहुँच गये। नाले के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गयी।

प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार भीड़ से विचलित बाघ घनी झाड़ियों में छुपकर बैठा रहा। लोग बाघ को देखने की उत्सुकता में उसके इतने समीप पहुँच गये कि फासला 08 से 10 फीट रह गया। दोपहर 12 बजे तक लोगों ने बाघ को देखा। वन अमला और कुरई पुलिस ने भीड़ को खदेड़ा और जाम खुलवाया तब जाकर बाघ यहाँ से ओझल हो गया।

महाराष्ट्र की ओर से आने का अंदेशा : जानकारों के मुताबिक बाघ पेंच से सटे महाराष्ट्र सीमा के खुरसापार गेट का है और यह युवा वारस नाम की टाईग्रेस है। सहायक वन संरक्षक आशीष बंसोड़ ने बताया कि यहाँ सुरक्षा में करीब सौ वनकर्मी तैनात हैं। इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गयी है।

पिछले कुछ माहों से बाघ की आवक आबादी वाले क्षेत्रों में बढ़ती दिख रही है। खतरनाक जंगली जानवरों के आबादी वाले क्षेत्रों में आने जाने से लोगों में भय के साथ ही साथ रोष और असंतोष बढ़ने लगा है। लोगों का कहना है कि पेंच का क्षेत्र अब जंगली जानवरों के लिये छोटा पड़ता दिख रहा है। इस लिहाज से अब या तो यहाँ से बाघों की बढ़ी आबादी को उन क्षेत्रों में ले जाकर छोड़ा जाना चाहिये जहाँ बाघों की तादाद कम है या पेंच के कोर एरिया में बढ़ौत्तरी की जाना चाहिये।



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