डोनाल्ड ट्रंप: पद का दुरुपयोग

अगर डोनाल्ड ट्रंप यह सोचते हैं कि राष्ट्रपति पद का इस्तेमाल निजी हित में करने में कोई गलती नहीं है, तो उन्हें देश का संविधान पढ़ना चाहिए। बुधवार को मैनहट्टन फेडरल कोर्ट में अभियोगियों ने यही दलील पेश की थी। अमेरिका के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी राष्ट्रपति के खिलाफ परिलाभ (इमॉल्युमेंट) संबंधी नियमों के दुरुपयोग को लेकर अदालत में मुकदमा चला हो।

सार्वजनिक जीवन से भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए संविधान निर्माताओं ने इन सांविधानिक प्रावधानों को अपनाया था। इनमें एक कायदा पदारूढ़ अमेरिकियों को विदेश की सरकारों से किसी प्रकार का पद, परिलाभ, कोई उपाधि या किसी प्रकार की सहायता लेने से रोकता है, जब तक कि कांग्रेस उसका अनुमोदन नहीं करती; तो एक और उप नियम अमेरिकी राष्ट्रपति को अपनी तनख्वाह के अलावा संघ या राज्यों की सरकारों से किसी तरह की धन राशि लेने से रोकता है। परिलाभ संबंधी ये कायदे इस विचार पर आधारित हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा व हितों को उस वक्त खतरा हो सकता है, जब सार्वजनिक पदों पर आसीन लोग अपने फायदे के लिए पद का दुरुपयोग करने लगते हैं।

बीती 20 जनवरी तक इन नियमों उप नियमों को याद करने की जरूरत नहीं पड़ी। अमेरिकी राष्ट्रपति अमूमन अपनी जायदाद के बारे में पारदर्शी रहे। वे अपनी संपत्तियों के ऊपर लगे टैक्स के भुगतान की घोषणा करते रहे हैं। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने इस परंपरा को निभाने से इनकार कर दिया, जबकि दुनिया भर में होटल, रियल एस्टेट, गोल्फ कोर्स और दूसरे कई सारे कारोबार पसरे हैं। चूंकि कांग्रेस ट्रंप की इस गतिविधि पर आंखें मूंद रखी है, ऐसे में संघीय कोर्ट का ही विकल्प रह जाता था। डोनाल्ड टं्रप ने 2015 सऊदी अरब के बारे में कहा था कि वे मुझसे अपार्टमेंट खरीदते हैं।

वे चार करोड़ पांच करोड़ डॉलर खर्च करते हैं, क्या मैं उन्हें नापसंद करूंगा? राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा पर वह सऊदी अरब ही गए।… ऐसे में, यह समझना मुश्किल है कि अमेरिकी ट्रंप को लेकर कैसे आश्वस्त हो सकते हैं कि वह देश के हक में सक्रिय हैं, न कि अपने आर्थिक हितों के लिए। (द न्यूयॉर्क टाइम्स, अमेरिका से साभार)

(साई फीचर्स)



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