दिव्यांग बेटी को 7 साल बाद स्पेन में मिली मां

(राजीव सक्‍सेना)

ग्वालियर (साई)। जिस दिव्यांग बच्ची को उसके माता-पिता ने बोझ समझ कर छोड़ दिया था उसी बच्ची को सात साल बाद सात समंदर दूर स्पेन में मां मिली है। स्पेनिश मां ने महिला बाल विकास मंत्रालय की कारा वेबसाइट पर बच्ची को देखा तो उसे पहली नजर में ही उससे प्यार हो गया।

बच्ची को लेने यह महिला 8000 किलोमीटर की हवाई यात्रा और रेलमार्ग का सफर तय शनिवार को ग्वालियर आ रही है। बच्ची को मातृछाया शिशु कल्याण केन्द्र द्वारा महलगांव स्थित करौली माता मंदिर के पास हिन्दू वैदिक रीति के अनुसार दीपयज्ञ कर स्पेनिश महिला को गोद दिया जाएगा।

शिशु कल्याण केन्द्र को एक साल पहले एक दिव्यांग बच्ची पीहू (परिवर्तित नाम) मिली थी। उस समय पीहू महज छह साल की थी जिसे उसके माता पिता ने छोड़ दिया था। उस समय पीहू काफी कमजोर थी लेकिन शिशु कल्याण केन्द्र की बेहतर देखभाल से बच्ची स्वस्थ्य हुई। इसके बाद इस बच्ची की जानकारी महिला बाल विकास मंत्रालय की बेवसाइट पर दी गई।

इसी बेवसाइट पर स्पेनिश महिला कैटरीना (परिवर्तित नाम) ने इसे देखा। बच्ची को देखते ही कैटरीना का मातृत्व उमड़ पड़ा और बच्ची को गोद लेने के लिए उन्होंने महिला बाल विकास मंत्रालय में आवेदन दिया। इस आवेदन के बाद बच्ची की गोद लेने की प्रक्रिया पूरी की गई। प्रक्रिया पूरी होते ही कैटरीना बच्ची को लेने के लिए 13 जनवरी को शताब्दी ट्रेन ग्वालियर आ रही हैं।

गोद लेने के भी है नियम

बच्चों को गोद लेने के लिए काफी जटिल नियम है, सिंगल पुरुष केवल बेटे को ही गोद ले सकते हैं। जबकि सिंगल मदर बेटा और बेटी दोनों को गोद ले सकती है। जबकि दम्पति दोनों को गोद ले सकते हैं।

सिंगल मदर है कैटरीना

कैटरीना अभी अविवाहित हैं, और उन्हें दिव्यांग बच्चों से बेहद प्यार है। कैटरीना स्पेन में दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने का कार्य करती हैं साथ ही वह उनकी देखभाल भी करती हैं।

तीन बच्चे ले सकते हैं गोद

नियम के अनुसार कोई भी दंपति या सिंगल मदर या पुरुष अपने जीवनकाल में केवल तीन बच्चों को ही गोद ले सकता है।

विदेश मंत्रालय रखता है ध्यान

विदेश में गोद लिए जाने वाले बच्चों का भारतीय दूतावास भी ध्यान रखता है। विदेश दूतावास के अधिकारी और कर्मचारी गोद लेने वाले परिवार के घर जाकर उसकी जानकारी लेते रहते हैं साथ ही समय समय पर बच्चों के बारे में सरकार को भी जानकारी भेजते रहते हैं।

रिजेक्ट होने पर ही विदेशी ले सकते हैं गोद

सरकार की प्राथमिकता रहती है कि कोई भारतीय ही बच्चे को गोद ले। लेकिन जब भारतीय दंपति चार बार बच्चे को रिजेक्ट कर देती है तब विदेशियों को बच्चों को गोद देने की प्रक्रिया शुरू होती है।

7951 किलोमीटर है दूरी

स्पेन से भारत में दिल्ली तक हवाई यात्रा की दूरी 7951 किलोमीटर है। हवाई यात्रा को पूरी करने के बाद कैटरीना दिल्ली में आएंगी यहां से वह रेल मार्ग से 313 किलोमीटर का सफर तय कर ग्वालियर तक पहुंचेंगी।



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