दोनों देश कर रहे मसखरी

(डा. वेद प्रताप वैदिक)

आतंकवादी हाफिज सईद के मामले में अमेरिका और पाकिस्तान, दोनों देश अपनी मजाक बनवा रहे हैं। हाफिज हंस रहा है और ये दोनों देश मसखरे बन गए हैं। डोनाल्ड ट्रंप की खुशामद में पाकिस्तान की सरकार ने अब से 10 माह पहले हाफिज सईद को उसके घर में नजरबंद कर दिया था लेकिन लाहौर उच्च न्यायालय ने अब उसे रिहा कर दिया है। हाफिज को पहले भी सात बार गिरफ्तार किया गया है।

छह बार लाहौर और एक बार इस्लामाबाद के न्यायालयों ने उसे रिहा किया है। हर बार अदालतों ने उसे निर्दाेष पाया है याने सरकारी वकील उसके खिलाफ बेहद कमजोर तथ्य पेश करते रहे हैं। ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान के वकील अयोग्य हैं लेकिन उनकी दिक्कत यह है कि उनकी सरकार ही बेचारी मजबूर है।

एक तरफ अमेरिका को खुश करने के लिए वह उसके तलुए चाटने के लिए तैयार रहती है और दूसरी तरफ वह अपनी फौज की बंधक बनी रहती है। ये आतंकवादी पाकिस्तानी फौज की अदृश्य भुजा हैं, जिसे वह भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल करती रहती है। जब तक पाकिस्तान की फौज के दिल से भारत का डर नहीं निकलेगा, इस्लामाबाद में कितनी ही भली सरकार आ जाए, आतंकवादी गतिविधियां जारी रहेंगी।

हाफिज सईद और उसके संगठनों- लश्करे तय्यबा व जमातुद्दावा- को अमेरिका और सुरक्षा परिषद ने आतंकवादी घोषित कर रखा है। अमेरिका ने उसके सिर पर 65 करोड़ रु. का इनाम भी रख रखा है। इसके बावजूद हाफिज सईद पाकिस्तान में खुलेआम घूमता है। भारत और अमेरिका पर तेजाबी शब्द-बाण चलाता है लेकिन अमेरिकी सरकार और फौज के लिए कितने शर्म की बात है कि जो उसामा बिन लादेन को मार सकती है, वह हाफिज को छू भी नहीं सकती।

नरेंद्र मोदी की सरकार ट्रंप के चरणों में बिछी जा रही है लेकिन ट्रंप उल्टे उस्तरे से उसकी हजामत किए दे रहे हैं। जो ट्रंप कल तक पाकिस्तानी आतंकवाद के खात्मे की कसमें खाते थे, उन्होंने कुछ दिन पहले ही पल्टी खा ली। पाकिस्तान में तालिबान के बंधक अमेरिकी नागरिक कैटलान कोलमान की रिहाई पर वे गदगद हो गए और सीनेट ने वह प्रावधान ढीला कर दिया, जिसके तहत आतंकवाद के कारण उसे अमेरिकी मदद रोकी जा सकती थी। सच पूछा जाए तो अमेरिका को उस आतंकवाद की जरा भी परवाह नहीं है, जो भारत के खिलाफ चल रहा है।

(साई फीचर्स)


डिसक्लेमर : ऊपर व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया इसका समर्थन या विरोध नहीं कराती है।

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