धूल खा रहे एयरो स्पोर्ट्स उपकरण!

(जाहिद शेख)

कुरई (साई)। राज्य शासन के द्वारा वर्ष 2015 में जिले की नवनिर्मित सुकतरा हवाई पट्टी को मैस्को एयरो कंपनी को लीज पर दिये जाने के बाद जिले में रोजगार की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद की जा रही थी, किन्तु इस कंपनी के छोटे हल्के एयरक्राफ्ट और दूसरे उपकरण अब धूल ही खा रहे हैं।

बताया जाता है कि कंपनी के द्वारा इस मामले में व्यापक प्रचार – प्रसार न किये जाने से पेंच नेशनल पार्क की सैर करने आने वाले देशी विदेशी पर्यटकों के द्वारा भी एयरो स्पोर्ट्स गतिविधियों के प्रति ज्यादा दिलचस्पी न लिये जाने से इसे फिलहाल बंद ही कर दिया गया है।

कंपनी से जुड़े सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि अब कंपनी इंडिया के पहले एयरोहब, एयरक्राफ्ट रिसाईक्लिंग प्रोजेक्ट को शुरु करने की तैयारी में जुट गयी है। पहले चरण में छोटे व हल्के विमानों के कलपुर्जों को बदलने और सुधारने का काम किया जायेगा।

सूत्रों ने बताया कि इसके लिये विमानन विभाग से जरूरी अनुमति मिलना बाकी है। कंपनी ने यूनाईटेड किंगडम की एक बड़ी विमानन कंपनी से समझौता कर लिया है, जो अनुमति संबंधी प्रक्रिया को पूरी करेगी। इसके बाद सुकतरा हवाई पट्टी में एयरक्राफ्ट रिसाईक्लिंग का काम शुरु हो सकेगा।

इसके साथ ही सूत्रों ने बताया कि हवाई पट्टी में मैस्को एविएशन कंपनी हल्के एयरक्राफ्ट को सुधारने और रिसाईक्लिंग करने का काम करेगी। एयरक्राफ्ट में स्पेयर लगाये और निकाले जायेंगे। हवाई पट्टी में बनाये गये हेंगर में एयरक्राफ्ट के जरूरी स्पेयर पार्ट्स रखे जायेंगे। हेंगर के बगल में स्थित खाली जमीन पर 50 गुणा 40 मीटर का कांक्रीट का प्लेटफॉर्म तैयार किया गया हैे। इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल एयरक्राफ्ट को सुधारने में किया जायेगा।

कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक एयरो स्पोर्ट्स की एडवेंचर गतिविधियों में पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों का सहयोग नहीं मिलने के कारण इसे चलाने में दिक्कतें आ रही हैं। कंपनी ने यहां पर कैम्पिंग के अलावा पैराग्राईडिंग, मिनी एयरक्राफ्ट की सैर समेत अन्य गतिविधियां शुरु की थीं, लेकिन पर्यटकों के गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेने के कारण इन्हें बंद कर दिया गया है।

बताया जाता है कि लगभग नौ साल पहले सात करोड़ की लागत से तैयार की गयी सुकतरा हवाईपट्टी की ऊपरी सतह जर्जर हो चुकी है। हवाईपट्टी में लगी गिट्टी लगातार ही उखड़ती जा रही है। हवाईपट्टी की हालत ऐसी हो गयी है कि इसमें हल्के विमान को छोड़कर दूसरे बड़े विमानों का उतर पाना काफी मुश्किल है।

इसी तरह बताया जाता है कि लगभग दो किलोमीटर लंबी इस हवाईपट्टी की ऊपरी सतह पर डामरीकरण और सुधार के साथ ही साथ चारदीवारी बनाने का प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग ने तैयार कर सरकार को भेजा था। 06 माह पहले सरकार ने हवाईपट्टी 15 साल की लीज पर मैस्को कंपनी के सुपुर्द कर दी। इसलिये अब इसकी देखरेख भी कंपनी की जिम्मेदारी बन गयी है।



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