नए युग में चीन-अमेरिका संबंध

उन तमाम मसलों पर चीन और अमेरिका की राय एक-दूसरे के उलट होती है, जो अक्सर काफी चर्चा में होते हैं और ये बाधाकारक मुद्दे दोनों देशों के रिश्तों को नियंत्रित भी करते हैं। व्यापारिक टकराव, कोरिया प्रायद्वीप को परमाणु-मुक्त बनाने और साउथ चाइना सी से जुड़े विवाद ऐसे ही मसले हैं, जो अक्सर सामने आ जाते हैं। लेकिन दोनों देशों के रिश्तों की पूरी सच्चाई यही नहीं है। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के हित इस तरह जुड़े हुए हैं कि वे इनके बीच सहयोग बढ़ाने का रास्ता बनाते हैं।

बुधवार को अमेरिका और चीन की कंपनियों ने करीब नौ अरब डॉलर के 19 समझौतों पर दस्तखत किए। उम्मीद है कि गुरुवार को राष्ट्रपति शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात में इनसे भी ज्यादा समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे। अप्रैल में शी और ट्रंप के बीच फ्लोरिडा में हुई पहली उच्चस्तरीय बैठक में इस बात पर सहमति बनी थी कि दोनों देश कूटनीतिक व सुरक्षा संबंधी मसलों, व्यापार व अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर और नागरिकों के मेल-जोल बढ़ाने व साइबर सुरक्षा के मामले में आपसी मतभेद कम करने की दिशा में काम करेंगे। और दोनों देशों ने वाकई इस बारे में काम भी किया है।

अहम बात यह है कि शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप, दोनों अपने निजी ताल्लुकात को बेहतर बनाने को भी पूरा-पूरा महत्व दे रहे हैं। बीजिंग पहुंचने पर अपने स्वागत से प्रसन्न राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे सार्वजनिक तौर पर जाहिर भी किया है। उन्होंने इसे एक यादगार लम्हा बताया है। ट्रंप के इस दौरे को स्टेट विजिट प्लस कहा जा रहा है, क्योंकि दोनों राष्ट्राध्यक्षों की अनौपचारिक मुलाकात के लिए खास तरह के इंतजाम किए गए हैं। और विदेशी संबंधों में निजी गर्मजोशी की अहम भूमिका को देखते हुए यह यकीन करने की पर्याप्त वजहें हैं कि शी-ट्रंप बातचीत के ठोस परिणाम निकलेंगे।

इन दोनों नेताओं की अप्रैल की बातचीत की सार्थकता ने भी इस उम्मीद को बल दिया है कि अपने निजी रिश्तों की गरमाहट को बढ़ाते हुए ये साझा सरोकार के मुद्दों पर भी करीब आएंगे। निस्संदेह, नई सहमतियों पर पहुंचकर शी और ट्रंप चीन व अमेरिका के आपसी संबंधों में नई ऊर्जा भर सकेंगे। (चाइना डेली, चीन से साभार)

(साई फीचर्स)



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