नो एन्ट्री को रखा जाये यथावत

मुझे शिकायत सिवनी के उन व्यापारियों से है जिन्हें अपने नफा-नुकसान का तो ख्याल है लेकिन आम जनता के जीवन से कोई सरोकार उन्हें शायद नजर नहीं आता है। दरअसल अभी-अभी अखबार में पढ़ा कि व्यापारियों के द्वारा दोपहर के वक्त नो एन्ट्री में छूट दिये जाने की अपील की गयी है। शायद प्रशासन ने भी उनकी माँग पर गौर करने का आश्वासन दिया है।

समझ में नहीं आता कि किस तरह की माँग है ये? क्या उक्त माँग कर रहे व्यापारियों को इस बात की जानकारी नहीं है कि भारी मालवाहकों का चालन आजकल किस तरह से हो रहा है। सड़क दुर्घटनाओं में किस तरह तेजी से वृद्धि दर्ज की जा रही है? क्या सिवनी में यातायात पहले से कम हो गया है जो भारी मालवाहक आसानी से शहर में बिना बाधा खड़ी किये प्रवेश कर जायेंगे?

व्यापारियों को सोचना चाहिये कि एक तरफ यातायात के दबाव को देखते हुए बस जैसे यात्री वाहनों को शहर के बाहरी क्षेत्र से आवागमन करने देने पर विचार चल रहा है। ये बसें शहर में यातायात जाम करने का कारण बन रही हैं। ऐसे में यदि ट्रकों को भी शहर में प्रवेश करने दे दिया गया तो क्या स्थिति खराब नहीं होगी? क्या भारी मालवाहक लोगों की जान के लिये जोखिम नहीं बनेंगे?

ऐसा क्यों है कि व्यापारियों को आम जनता के जीवन से ज्यादा खुद की परेशानी बड़ी लग रही है? यदि भारी मालवाहक शहर में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं तो बेहतर होगा कि उसकी कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनायी जाये। शहर के बाहर ही माल को उतरवाकर व्यवस्था बनायी जा सकती है। इसके लिये छोटे वाहनों का सहारा लिया जा सकता है। व्यापारियों को चाहिये कि वे अपने गोदामों को शहर के बाहर स्थापित करें। हालाकि यह खर्चीला साबित होगा लेकिन लोगों की जान, हर हाल में उस खर्च से ज्यादा मायने रखती है।

व्यापारियों को शायद यातायात से कोई लेना-देना ही नहीं दिखता है। व्यापारिक संगठन उन व्यापारियों से अतिक्रमण हटाने के लिये क्यों नहीं कहते जिन व्यापारियों ने अतिक्रमण करते हुए सड़कों को संकरा बना दिया है। इन संकरी सड़कों पर अब वे ट्रकों का भी प्रवेश चाहते हैं।

इस तरह की माँग हास्यास्पद तो है ही लेकिन चिंताजनक भी इसलिये है क्योंकि इससे यह साबित हो रहा है कि व्यापारियों को न तो यातायात से कोई लेना-देना है और न ही लोगों के जीवन से ही उन्हें कोई सरोकार है। यदि ऐसा न होता तो क्या नो एन्ट्री में छूट दिये जाने की माँग की जाती? प्रशासन से अपील है कि वह सभी पहलुओं पर गंभीरता पूर्वक विचार करने के उपरांत ही इस संबंध में कोई निर्णय ले।

सिद्धार्थ अग्निहोत्री


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