पत्नी के बाद भी रही है करीब-करीब सिंगल वाली स्थिति: इरफान खान

(निधि गुप्‍ता)

मुंबई (साई)। इरफान खान बॉलिवुड के उन सशक्त अभिनेताओं में से हैं, जिन्होंने हर बार कुछ नया कर दर्शकों को हैरान किया है। अपनी सीरियस इमेज को तोड़ते हुए इरफान अब कॉमिडी, रोमांटिक किरदार निभाते नजर आ रहे हैं।

यही वजह है पीकू में उनके इस अंदाज को दर्शकों का ढेर सारा प्यार भी मिला। इन दिनों इरफान अपनी नई फिल्म करीब-करीब सिंगलको लेकर चर्चा में हैं। फिल्म की कहानी आज के यूथ को टारगेट करती है। फिल्म में प्यार के कन्फ्यूजन, ट्रैवलिंग आदि का मसाला देखने को मिलता है। फिल्म में अपने किरदार और अपनी निजी जीवन के बारे में इरफान ने एक वेब साईट से बातचीत की।

फिल्म में आप पार्वती संग पहली बार स्क्रीन शेयर कर रहे हैं। कैसा एक्स्पीरियंस रहा?

देखिए, हमारे यहां काम करने का अंदाज काफी अलग होता है। आप पिंजड़े में रहकर अपने में मग्न हो काम नहीं कर सकते हैं। मुझे आपसे कोई लेना-देना नहीं है और फिर भी मैं आपके सामने आकर चार-पांच रोमांटिक लाइनें बोल दूं। शूटिंग के दौरान जरूरी होता है कि आपका और आपके को-स्टार की ट्यूनिंग मिले। सीन्स के दौरान आपको सामने वाले पार्टनर के सहयोग की जरूरत पड़ती है। इस फिल्म की डिमांड भी कुछ ऐसी थी कि ऐक्ट्रेस गर्ल नेक्स्ट डोर सी हो। वह बहुत ही अट्रैक्टिव होते हुए भी अपनी जिंदगी एक्स्प्लोर नहीं कर पा रही है। कुछ इस अंदाज में यह किरदार बुना गया था। कास्टिंग इसकी मुश्किल थी। तनुजा ने मुझे पार्वती का नाम सजेस्ट किया। मैंने पार्वती की फिल्में देखीं और मुझे लगा कि यह लड़की हमारे किरदार के लिए परफेक्ट हैं। बहुत ही बेहतरीन अदाकारा हैं, सच कहूं तो काम करने के दौरान मैं थोड़ा नर्वस हो गया था।

फिल्म का टाइटल आज के यूथ का हाल बयां करती है। आज के यूथ रिलेशनशिप की जिम्मेदारी लेने से हिचकते हैं। आप क्या कहना चाहेंगे?

मैं हमेशा से यह मानता आया हूं कि जहां आप रिश्ते को नाम देने लगते हैं वहीं से आप इसकी सीमाएं तय कर देते हैं। हम रिश्तों में हमेशा ठहराव चाहते हैं। हमेशा यह जल्दबाजी रहती है कि भई इस रिश्ते का नाम तय करो, दिक्कतें वहीं से शुरू हो जाती है। वे इक्वेशन जो इतना मैजिकल व मजेदार हैं उन्हें नाम देकर उसे कैद करने की कोशिश करने लगते हैं। यह बात आज के समय की नहीं है। हमेशा से लोग कहते रहें कि रिश्तों को कोई नाम नहीं दो। इस फिल्म में हमने यही कोशिश की है कि यह दोनों यह एक ऐसे स्टेज में पहुंच चुके हैं जहां अब किसी रिश्ते को नाम देने का बंधन है।

आपने पिछले कुछ समय में दर्शकों को काफी चौंकाया है। दर्शक आपके इस अंदाज से वाकिफ नहीं थे?

नहीं, मैंने कभी कुछ प्लान नहीं किया है अपनी जिंदगी में। बस मुझे यही लगा है कि आज यह कर लिया है तो अब मेरा मन कुछ और करने का है। मैं उसी की तलाश में रहता हूं। मैंने जब-जब प्लान किया है उस तरह से चीजें हुई नहीं हैं। मैंने लाइफ ऑफ पाईजैसी फिल्म बच्चों के लिए की हैं। मैं चाहता हूं कि भविष्य में भी उनके लिए कुछ और फिल्में करूं। जैसा रास्ता बनता जाएगा वैसे ही चलता जाऊंगा।

क्या आपका इरादा अपनी गंभीर इमेज को ब्रेक करना है?

मैं तो इमेज बनने के पहले ही उसे तोड़ देता हूं। जिस दिन मेरी इमेज बन गई और लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया कि इरफान फलां रोल में ज्यादा अच्छा लगता है तो वहीं से मेरे लिए खतरा शुरू हो जाएगा। इसलिए बेहतर यही है कि आपने जो इमेज बनाई है उसे अगली फिल्म में तोड़ दो। खुद तोड़ो और खुद बनाओ, अगर हम बंजारे बन जाएं न तो दुनिया की सारी समस्याएं काफूर हो जाएंगी। स्थायित्व को खोजना छोड़ दे तो हम सुकून से रह पाएंगे।

इरफान अपने करियर के लंबे सफर में आपने क्या खोया और क्या पाया?

सिर्फ जो पाया है वह यह है कि रोज जब खुद को देखता हूं तो एहसास होता है कि मेरा खुद से जो रिश्ता है वह पाया है। बहुत सारी कुंठाएं थीं, चीजें समझ नहीं आतीं थी उनको लेकर एक नजरिया मिला है। मेरा बंजारेपन से जो रिश्ता जुड़ा है वो मेरा सबसे बड़ा अचीवमेंट है। मैं सिक्योर्ड हूं, मुझे किसी परिभाषा की जरूरत नहीं है, मुझे किसी के डर से कुछ लेना देना नहीं है। एकदम बंजारा बन चुका हूं।

कभी आपकी जिंदगी में करीब-करीब सिंगल वाली स्थिति आई है?

हमेशा से रही है। सुतापा के जिंदगी में आने के बाद भी ऐसी स्थिति रही है(हंसते हुए)। आप दो लोग साथ में रहते हुए भी सिंगल रहते हो। आदमी जबतक खुद को पूरी तरह से नहीं खोज पाता है तब तक वह सिंगल रहता है। आप डबल तब ही होते हैं जब दो लोगों ने अपने आपको पूरी तरह से खोज लिया है। खुद को एक्स्प्लोर करना आपने आप में एक लाइफ लॉन्ग जर्नी होती है।



0 Views

Related News

  (शरद खरे) सिवनी जिले में अब तक बेलगाम अफसरशाही, बाबुओं की लालफीताशाही और चुने हुए प्रतिनिधियों की अनदेखी किस.
  मानक आधार पर नहीं बने शहर के गति अवरोधक (अय्यूब कुरैशी) सिवनी (साई)। जिला मुख्यालय सहित जिले भर में.
  धड़ल्ले से धूम्रपान, तीन सालों में एक भी कार्यवाही नहीं (अखिलेश दुबे) सिवनी (साई)। रूपहले पर्दे के मशहूर अदाकार.
  (ब्यूरो कार्यालय) सिवनी (साई)। सर्दी का मौसम आरंभ होते ही हृदय और लकवा के मरीजों की दिक्कतें बढ़ने लगती.
  दिल्ली के पहलवान कुलदीप ने जीता खिताब (फैयाज खान) छपारा (साई)। बैनगंगा के तट पर बसे छपारा नगर में.
  (ब्यूरो कार्यालय) सिवनी (साई)। सिर पर टोपी, गले में लाल गमछा, साईकिल पर पर्यावरण के संदेश की तख्ती और.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *