पाण्डेय के आते ही पालिका हुई सक्रिय

(शरद खरे)

सिवनी में भाजपा शासित नगर पालिका परिषद में जिस तरह की कार्यप्रणाली लगभग डेढ़ दशक से अपनायी जा रही है उससे यही प्रतीत होता है कि न तो पालिका के चुने हुए प्रतिनिधियों, न काँग्रेस और भाजपा संगठन को ही जिला मुख्यालय के निवासियों की चिंता है। और तो और सरकारी वेतन पाने वाले मुख्य नगर पालिका अधिकारियों ने भी सिवनी में पदस्थ रहकर अपना समय ही काटा है।

यह कहने का ठोस आधार यह है कि शहर की साफ सफाई की बात हो, आवारा मवेशियों की अथवा बिना वैध अनुज्ञा के निर्माण की या शहर में प्रदाय होते गंदे पानी की। कमोबेश हर मामले में नगर पालिका में भर्राशाही ही नजर आती रही है। एक के बाद दूसरी, दूसरी के बाद तीसरी परिषद आयी पर पालिका का रवैया नहीं सुधर सका।

सिवनी में अब तक जितने भी मुख्य नगर पालिका अधिकारी पदस्थ रहे हैं उनमें से कुछ को अगर छोड़ दिया जाये तो बाकी सभी ने भी सिवनी के विकास के लिये किसी तरह का रोडमेप तैयार करने की बजाय भ्रष्टाचार की गंगोत्री में ही डुबकी लगाना उचित समझा। इस बात का जीता जागता उदाहरण सिवनी की मॉडल रोड और नवीन जलावर्धन योजना है।

बीरबल की खिचड़ी बन चुकी मॉडल रोड आज भी पूरी नहीं हो पायी है, वहीं 48 करोड़ की नवीन जलावर्धन योजना में भ्रष्टाचार के अनेक आरोप लगने के बाद भी इस मामले में किसी के द्वारा अब तक न तो आधिकारिक तौर पर इस मामले में पालिका का पक्ष रखा गया है और न ही किसी ने आरोपों का खण्डन ही किया है।

शहर की साफ सफाई के साथ ही साथ नगर पालिका के अंदर बाबुओं की लालफीताशाही से नागरिक आज़िज आ चुके हैं। कहा तो यहाँ तक भी जा रहा है कि पिछले विधानसभा चुनावों मेें भाजपा के गढ़ सिवनी में भाजपा के प्रत्याशी नरेश दिवाकर को निर्दलीय दिनेश राय के द्वारा जिस तरह से आसानी से पटखनी दी गयी उसमें पालिका की झींगामस्ती के कारण नागरिकों का भाजपा के ऊपर से विश्वास उठना प्रमुख था।

बहरहाल, नवागत मुख्य नगर पालिका अधिकारी नवनीत पाण्डेय के द्वारा जबसे कार्यभार ग्रहण किया गया है उसके बाद से नगर पालिका में अपेक्षाकृत सक्रियता महसूस की जा रही है। नवनीत पाण्डेय की कार्यप्रणाली से आम जनता तो राहत महसूस कर रही रही है, पर कर्मचारियों (कामचोर और भ्रष्ट को छोड़कर) के अंदर भी एक आत्म विश्वास दिखायी देने लगा है।

आप अगर सुबह सवेरे किसी सफाई कर्मी से बात करें तो अन्जाने में वह अपना दर्द बयान करते हुए यह कह देगा कि इस तरह के सीएमओ (नवनीत पाण्डेय) की जरूरत वाकई में महसूस की जा रही थी। लोगों का कहना तो यह है कि अगर नवनीत पाण्डेय के तेवर इसी तरह तल्ख रहे तो आने वाले दिनों में आम जनता को नगर पालिका में काम करवाने के लिये न तो ज्यादा देर इंतजार करना होगा और न ही पालिका के अंदर वैसा भ्रष्टाचार दिखेगा जो वर्तमान में दिखायी दे रहा है।



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