पीडब्ल्यूडी की टेस्टिंग लेब बनी पहेली!

मनमाने तरीके से हो रही टेस्टिंग, नहीं हो रहा नियमों का पालन!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। लोक निर्माण विभाग में इस समय सौ करोड़ रूपयों से अधिक के निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। इन निर्माण कार्यों में किस स्तर की निर्माण सामग्री का उपयोग किया जा रहा है इसके लिये विभागीय परीक्षण प्रयोगशाला इन दिनों विभाग में ही चर्चाओं का केंद्र बनी हुई है।

लोक निर्माण विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री कार्यालय के पीछे यह प्रयोगशाला स्थित है। इस प्रयोगशाला में पदस्थ टाईमकीपर की मनमर्जी पूरी तरह चलती है। उन्हें भी नियम विरूद्ध तरीके से यहाँ पदस्थ किया गया है। बताया जाता है कि वे अधीक्षण यंत्री के बहुत ही मुँहलगे कर्मचारी हैं, जो एसई की हर पसंद और सुविधाओं का ख्याल रखते हैं।

सूत्रों ने बताया कि इस प्रयोगशाला का प्रभार जिला मुख्यालय में पदस्थ एक महिला अनुविभगीय अधिकारी को दिया गया है। सूत्रों की मानें तो निर्माण कार्य में प्रयुक्त होने वाली सामग्री की गुणवत्ता को अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री, अनुविभागीय अधिकारी की उपस्थिति में जाँचा जाना चाहिये, पर वास्तव में ऐसा हो नहीं रहा है।

ठेकेदारों के द्वारा सूत्रों ने बताया कि इस प्रयोगशाला में पदस्थ कर्मचारियों और अधिकारियों को सिद्ध कर मनमानी रिपोर्ट तैयार करवायी जा रही है। सूत्रों ने कहा कि निर्माण कार्य में प्रयुक्त होने वाली मुरम का ही उदाहरण लिया जाये तो 35 रूपये घनमीटर के हिसाब से मुरम का परीक्षण शुल्क ठेकेदार को शासन के खाते में जमा करवाया जाना होता है।

सूत्रों ने बताया कि जिला प्रशासन अगर इस बात की ही जाँच करवा ले कि निर्माण कार्य कितनी राशि का है और ठेकेदार के द्वारा कितनी राशि निर्माण सामग्री के परीक्षण शुल्क के रूप में जमा करवायी गयी है तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है।

इसके साथ ही सूत्रों ने कहा कि लोक निर्माण विभाग की प्रयोगशाला में रिश्वत का भारी लेनदेन भी विभाग में चर्चाओं में है। सूत्रों ने कहा कि चूंकि प्रयोगशाला जनता से सीधे जुड़ा मसला नहीं है इसलिये यहाँ होने वाले चमत्कारों के बारे में खबरें बाहर नहीं आ पाती हैं। इस प्रयोगशाला में होने वाले क्रिया कलापों की अगर जाँच की जाये तो हैरत अंगेज बातें भी सामने आ सकती हैं।

सूत्रों ने आगे बताया कि हाल ही में एक ठेकेदार के द्वारा यहाँ पदस्थ एसई के मुँहलगे कर्मचारी को उपेक्षित कर एक रिपोर्ट बनवा ली गयी है जिसके चलते यहाँ विवाद की स्थिति निर्मित हो गयी थी। इसके चलते अंदर होने वाली गफलतों की खबरें बाहर आना आरंभ हो गयी हैं।

इसी तरह सूत्रों ने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार को निर्माण कार्य स्थल पर एक प्रयोगशाला स्थापित किया जाना आवश्यक होता है ताकि गुणवत्ता बनी रहे। इसके अलावा विभाग की ओर से उस निर्माण कार्य का अधीक्षण (सुपरविजन) कर रहे उपयंत्री अथवा एसडीओ का यह दायित्व होता है कि वह निर्माण कार्य में प्रयुक्त होने वाली सामग्री की जाँच जिला मुख्यालय स्थित प्रयोगशाला से करवायें।



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