प्रत्येक जीव 06 डाकुओं से लुटता रहता है : राष्ट्रसंत

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। इस मायावी संसार में प्रत्येक जीवात्मा मुसाफिर की तरह है। उसकी इन्द्रियाँ व्यापार हैं। 16 वर्ष से लेकर 55 वर्ष की आयु तक मानव अपने जीवन में लुटता रहता है उसे लूटने वाले 06 डाकू हैं, जिनमें काम, क्रोध, मद, मोह, लोभ और मत्सर का समावेश है। इन्हीं के माध्यम से व्यक्ति लुटता है और अपने जीवन को नारकीय बनाता है।

उक्ताशय की बात अपने प्रवचन के दौरान राष्ट्रसंत स्वामी प्रज्ञानानंद के द्वारा पलारी में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ के दौरान भरत की कथा के माध्यम से कही गयी।

उन्होंने बताया कि हिरण के मोह में जब भरत उसके पीछे भाग रहे थे तब वह मायावी हिरण उनके समक्ष मानव रूप में खड़ा हो गया और उनसे पूछा कि तुम कौन हो? तब भरत ने भी उससे यही प्रश्न किया कि तुम कौन हो? आज इस संसार में हम सब मानव के समक्ष यही स्थिति है। हम एक-दूसरे को तो जानना चाहते हैं, लेकिन अपने – आपको जानने की कोशिश हमारे द्वारा नहीं की जाती और इसी कारण हमारा यह जीवन मायावी चक्रों में फंसकर निरर्थक होता है और जाने – अन्जाने में किये गये अशुभ कार्यों के कारण हमें इस जीवन के उपरांत नारकीय यातना सहने को विवश होना पड़ता है।

अपने प्रवचन में स्वामी प्रज्ञनानंद ने बताया कि सृष्टि के 14 लोक हैं जो भगवान के ही अंग हैं। इनमें एक पाताल भी है और उसके नीचे 28 प्रकार के नरक हैं। इन 28 नरकों में जो व्यक्ति जैसे कुकृत्य करता है उसके अनुसार उसे यहाँ रहकर यातनाएं सहनी पड़तीं हैं।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस कलयुग में श्रीमद् भागवत ऐसा ग्रंथ है जिसके श्रवण और अनुशरण से व्यक्ति को इन नारकीय यातनाओं से सहज ही मुक्ति मिल जाती है। न केवल भागवत कथा को आयोजित कराने वाले बल्कि इस कथा का श्रवण करने वाले भी भाग्यशाली होते हैं। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रेरणा दी कि वे अपने जीवन में सत्संग और सत्कर्म करते हुये इस मानव जीवन को सफल बनायें।



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