प्रद्युम्न की हत्याः कुछ सवाल

(डॉ. वेदप्रताप वैदिक)

गुड़गांव के रयान स्कूल में हुई एक बच्चे की हत्या की जो नई परतें अब खुली हैं, वे दिल दहला देनेवाली हैं। प्रद्युम्न नामक छात्र की हत्या के लिए स्कूल बस के कंडक्टर अशोक कुमार को जिम्मेदार ठहराकर गिरफ्तार कर लिया गया।

हरयाणा पुलिस ने उसे पीट-पीटकर उससे जुर्म भी कबूल करवा लिया। लेकिन प्रद्युम्न के पिता के आग्रह पर जब केंद्रीय जाॅच ब्यूरो (सीबीआई) को यह मामला सौंपा गया तो मालूम पड़ा कि प्रद्युम्न की हत्या उसी स्कूल के एक वरिष्ठ छात्र ने कर दी थी।
इस छात्र ने स्कूल के अधिकारियों को प्रद्युम्न के शव की खबर सबसे पहले दी थी। सीसीटीवी और चाकू ने सुराग दिया और कथित असली हत्यारा पकड़ा गया। यह सारा मामला इतना अजीब है कि यह देश की पुलिस व्यवस्था
, न्याय व्यवस्था, पत्रकारिता और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न-चिन्ह लगा देता है।

उस तथाकथित छात्र हत्यारे के पिता का कहना है कि यदि उसने चाकू से हत्या की होगी तो उसकी कमीज पर खून के दाग तो होने चाहिए थे। ये दाग न तो स्कूल में किसी ने देखे और न ही घर में ! तो क्या सीबीआई की जांच बिल्कुल निराधार है? हत्या का कारण भी अजीब है। कहा जा रहा है कि वह लड़का पढ़ाई में कमजोर था और वह चाहता था कि उस दिन होनेवाली परीक्षा टल जाए। स्कूल की छुट्टी हो जाए।

इसीलिए उसने प्रद्युम्न की हत्या कर दी। परीक्षा टल गई। प्रद्युम्न की जगह कोई भी हो सकता था। यह तथ्य भी हत्या के नए आरोपी ने उगला होगा। अब देखिए, अदालत क्या करती है? बेचारे कंडक्टर पर जेल में क्या गुजर रही होगी?

हमारी पुलिस की करतूतों के कारण सैकड़ों अशोक कुमार जैसे लोग निर्दोष होते हुए भी क्या हमारी जेलों में सड़ नहीं रहे हैं? उनके पास वकीलों के बटुए भरने की ताकत कहां होती है? अशोक का केस कोई वकील नहीं लड़ेगा, ऐसा संकल्प गुड़गांव के वकील संघ ने ले लिया था। अब वह क्या करेगा? हमारे पत्रकार भाइयों ने भी गजब ढाया। वे अशोक के पीछे हाथ धोकर पड़ गए। किसी ने खुद खोजबीन करने का कष्ट नहीं उठाया। पुलिस की लापरवाही के कारण खट्टर सरकार भी बदनामी झेल रही है। यहां यह प्रश्न भी उठता है कि इन पब्लिक स्कूलों में कैसी संस्कृति पनप रही है?

परीक्षा में पास होना क्या इतनी बड़ी बात है कि उसके लिए हत्या कर दी जाए? छात्रों के माता-पिता से अंधाधुंध फीसें बटोरना, बच्चों का बढ़ता हुआ मानसिक तनाव और ढोंगभरी जीवन-शैली भी इस तरह की जघन्य घटनाओं का कारण बन जाती है।

(साई फीचर्स)


डिसक्लेमर : ऊपर व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया इसका समर्थन या विरोध नहीं कराती है।

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