फिर दिये जीपीएस, स्पीड गर्वनर लगाने के निर्देश

खनिज अधिकारी निर्देश दे चुके हैं 07 दिसंबर को!

(स्पेशल ब्यूरो)

सिवनी (साई)। जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड की अध्यक्षता में जिला स्तरीय खनिज टास्क फोर्स की बैठक संपन्न हुई। इसमें जिला खनिज अधिकारी, अतिरिक्त परिवहन अधिकारी, वन विभाग के अधिकारियों के साथ अन्य संबंधी अधिकारी भी उपस्थित थे।

मंगलवार को जारी सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार आयोजित बैठक में अवैध खनिज परिवहन को रोकने के लिये महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। कलेक्टर श्री डाड नें निर्देशित किया कि खनिज परिवहन करने वाले वाहन में गति नियंत्रक तथा जीपीएस लगाये जायंे ताकि अवैध खनिज परिवहन एवं वाहनों की गति में कमी लायी जा सके। इससे दुर्घटनाओं में कमी आयेगी। उन्होंने निर्देश दिया कि एस.डी.एम. एवं तहसीलदार तहसीलस्तर पर ही अवैध खनिज परिवहन को रोकने के लिये आवश्यक कार्यवाही करें।

यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि पूर्व में 07 दिसंबर को जारी सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार कमोबेश इसी तरह के निर्देश खनिज अधिकारी के द्वारा दिये जा चुके हैं। खनिज अधिकारी के निर्देश देने के बाद जिला कलेक्टर के द्वारा निर्देश जारी किये जाने से अब तरह – तरह की चर्चाओं के बाजार गर्माने लगा है।

लोगों का कहना है कि पूर्ववर्ती जिला कलेक्टर भरत यादव एवं धनराज एस. के कार्यकाल में जिस तरह कड़े निर्देश जारी किये जाते रहे हैं पर उनमें से कितने निर्देशों पर अमली जामा पहनाया गया इस बारे में देखने की फुर्सत किसी को भी नहीं रही। उसी तर्ज पर वर्तमान में दिशा निर्देश जारी किये जा रहे हैं पर उनकी मॉनिटरिंग नहीं की जा रही है।

कहा जा रहा है कि सीएम हेल्प लाईन में लगातार सात-आठ सप्ताहों से समय सीमा बैठकों में जिला कलेक्टर के द्वारा प्रकरणों के निराकरण के लिये अधिकारियों को निर्देश तो जारी किये जा रहे हैं किन्तु इन निर्देशों पर कौन सा विभाग कितना अमल कर रहा है इस बारे में शायद ही कभी पूछ परख की जाती हो।

एक अधिकारी ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि समय सीमा की बैठकों में अधिकारियों के द्वारा जिस तरह के जवाब दिये जा रहे हैं और उसके बाद भी उनके खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही नहीं की जा रही है इससे अधिकारियों में उच्चश्रृंखलता बढ़ती ही जा रही है।

उन्होंने कहा कि पिछले माह जिला कलेक्टर गोपाल चंद डाड के द्वारा झोला छाप चिकित्सकों की मश्कें कसने के लिये खण्ड स्तरीय दल का गठन किया गया था। ज्ञातव्य है कि 10 नवंबर को जारी सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार सिवनी जिले में अपात्र चिकित्सकों, मध्य प्रदेश अमान्य चिकित्सा पद्धतियों, झोलाछाप चिकित्सकों द्वारा अवैधानिक रूप से किये जा रहे चिकित्सा व्यापार के विरूद्ध कार्यवाही हेतु कलेक्टर गोपाल चंद डाड ने जिले के प्रत्येक विकास खण्ड में तहसीलदार की अध्यक्षता में खण्डस्तरीय दल का गठन किया गया था।

इस दल में संबंधित थाना प्रभारी को सदस्य एवं विकास खण्ड चिकित्सा अधिकारी को सदस्य सचिव बनाया गया है। यह दल विकास खण्ड में निरीक्षण कर विधि विरूद्ध कार्य करने वाले चिकित्सकों के प्रकरण तैयार कर कार्यवाही हेतु वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित करेंगे। इस दल के कार्य करने से झोला छाप चिकित्सकों से ग्रामीणों को मुक्ति मिलने की उम्मीद जतायी गयी थी।

विडम्बना ही कही जायेगी कि इस दल के गठन की जानकारी तो सरकारी विज्ञप्ति के माध्यम से दे दी गयी थी, किन्तु एक माह बीत जाने के बाद भी ब्लॉक स्तरीय इस दल के द्वारा कितने ग्रामों में जाकर चिकित्सकों की डिग्री आदि की जाँच की गयी? इस बारे में सुध लेने की फुर्सत किसी को भी नहीं मिल पायी है।



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