बलूचिस्तान में खून-खराबा

बलूचिस्तान हादसों और हिंसा की गिरफ्त में लगातार बना हुआ है। मौत का सिलसिला जारी है। यह सही है कि बीच में इसकी रफ्तार कुछ धीमी पड़ी थी, मगर एक बार फिर इसमें तेजी आ गई है। बीते बुधवार को घटी दो घटनाएं इसकी तस्दीक करती हैं। क्वेटा के नवां किल्ली इलाके की वारदात में मोटरसाइकिल पर सवार दहशतगर्दों ने एसपी मुहम्मद इलियास को उनके घर के करीब ही मार डाला।

इस हमले में उनकी बीवी, बेटा और छह साल का पोता भी मारे गए, पोते से भी छोटी पोती बुरी तरह जख्मी हो गई। इलियास इस इलाके के दूसरे बडे़ पुलिस अफसर हैं, जो एक महीने के भीतर मारे गए हैं। वहां पर तरह-तरह की कट्टरपंथी जमातें सक्रिय हैं, हालांकि अब तक किसी ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं कबूली है। हिंसा की एक अन्य कार्रवाई में ईरान से लगे सरहदी इलाके तुरबत में 15 लोग मारे गए।

ये सभी लोग पंजाब के अलग-अलग हिस्से के थे और कुछ रोज पहले ही इन सभी को अगवा किया गया था। ये सभी ईरान की सीमा में दाखिल होने की कोशिश कर रहे थे, ताकि वहां से आगे गैर-कानूनी प्रवासी के रूप में यूरोप में प्रवेश कर सकें। मगर उनका सफर अपने मुल्क की सरहद में ही पूरा हो गया। उनकी बदनसीबी की खबर उनके शहर, गांव और टोलों में पहुंच चुकी है और इसने इन सबके खानदानों के अलावा दूसरे बाशिंदों की हताशा को और गहरा दिया है।

ये दोनों ही हमले ठीक उसी दिन हुए, जब नेशनल सिक्युरिटी कमिटी बलूचिस्तान की सुरक्षा-व्यवस्था की समीक्षा करने बैठी थी। इन घटनाओं ने उजागर किया है कि कितना कुछ करना अभी बाकी है। बहरहाल, कमिटी ने फैसला किया है कि बलूचिस्तान की तरक्की के लिए और अधिक संसाधन लगाए जाएंगे, लेकिन यह स्पष्ट है कि सिर्फ पैसे से समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता।

आईएस जैसे आतंकी संगठन बलूचिस्तान में अपनी जड़ें जमाने में सक्षम हैं और उन्हें ऐसा करने से रोकने की जरूरत है। बलूचिस्तान में शांति कायम करने का एकमात्र रास्ता स्मार्ट तरीके से कानून लागू करने के साथ वह समझदारी विकसित करना भी है, जो बलूच लोगों को संतुष्ट कर सके। (द न्यूज, पाकिस्तान से साभार)

(साई फीचर्स)



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