बांग्लादेश में पोप का स्वागत

हम बांग्लादेश की सरजमीं पर पोप फ्रांसिस का दिल से स्वागत करते हैं। पोप फ्रांसिस तीन रोजा दौरे पर इन दिनों बांग्लादेश में हैं। हमारे लिए ये ऐतिहासिक पल हैं, खासकर बांग्लादेश में बसने वाले ईसाई मजहब के लोगों के लिए। पोप फ्रांसिस म्यांमार का दौरा मुकम्मल करके यहां आए हैं। गौर करने वाली बात यह भी है कि बौद्ध बहुल म्यांमार जाने वाले वह पहले बिशप हैं और उनके दौरे का मकसद भाईचारा और अम्नो-अमान कायम करना है। कहने की जरूरत नहीं कि पोप फ्रांसिस का म्यांमार और बांग्लादेश का दौरा ऐसे वक्त पर हो रहा है, जब हमारी दक्षिण-पूर्वी सरहद पर शरणार्थी समस्या मुंह बाए खड़ी है।

हालांकि हम इस बात को लेकर थोड़ी निराशा भी महसूस कर रहे हैं कि बीते मंगलवार को म्यांमार के नाएप्यीडा के अपने संबोधन में पोप को रोहिंग्या मसले को नजरअंदाज करने के लिए बाध्य होना पड़ा। पोप फ्रांसिस की जितनी बड़ी नैतिक आभा है, उसे देखते हुए हम यह मानते हैं कि वह दुनिया भर में जुल्म के मारे अल्पसंख्यकों की भलाई के लिए बड़ा काम कर सकते हैं। म्यांमार में रोहिंग्या अल्पसंख्यकों के हक-हकूक कैसे छीने गए और उनके ऊपर म्यांमार की फौज ने किस कदर कहर बरपाया है, इस हकीकत से अब पूरी दुनिया वाकिफ है और बाकायदा इसके दस्तावेज भी उपलब्ध हैं।

अलबत्ता, हमें अब भी यह उम्मीद है कि पोप फ्रांसिस दमित-पीड़ित लोगों के पक्ष में खडे़ होने और उनकी भलाई के लिए काम करने की जिस महान विरासत की नुमाइंदगी करते हैं, उसका निबाह करते हुए वह रोहिंग्या समुदाय के लोगों के मुसलसल उत्पीड़न के खिलाफ इस अहम दौरे में आवाज उठाएंगे। पिछले तीन महीनों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने रोहिंग्या समुदाय के लोगों का खुलकर साथ दिया है, और उनके ऊपर ढाए जा रहे जुल्म की खुलकर मजम्मत भी की है।

हमें यह लगता है कि पोप के अल्फाज इन सताए हुए लोगों के हक में उठी आवाजों को बुलंद करेंगे। उनके शब्द न सिर्फ उन्हें ताकत देंगे, बल्कि उसे दुनिया भर में भी पहुंचाएंगे। पोप का ऐसा करना रोहिंग्या मसले के लिहाज से काफी अहम होगा। (द डेली स्टार, बांग्लादेश से साभार)

(साई फीचर्स)



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