बिना विशेषज्ञ कैसे हो गया बच्चों का परीक्षण!

प्रभारी सीएमएचओ का बस नहीं था चिकित्सकों पर!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। निःशक्त, दिव्यांग विद्यार्थियों के चिकित्कीय मूल्यांकन शिविरों में विकलांगता प्रमाण पत्र जारी करने और उनके नवीनीकरण के लिये जिले भर में आयोजित किये जाने वाले शिविरों में व्यापक स्तर पर फर्जीवाड़े की चर्चाएं जोरों पर हैं। कहा जा रहा है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुपस्थिति में ही मनमाने तरीके से प्रमाण पत्र जारी कर दिये गये हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि निःशक्त, दिव्यांग विद्यार्थियों के लिये प्रमाण पत्र जारी करने और उनकी समयावधि पूरी हो जाने पर उनके नवीनीकरण के लिये विकास खण्ड स्तर पर शिविरों का आयोजन किया गया था।

सूत्रों ने बताया कि इन शिविरों की तिथियां भी तत्कालीन प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव से चर्चा के बाद ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों के द्वारा तय की गयी थीं। इन शिविरों में जिला स्तरीय मेडीकल बोर्ड के द्वारा दिव्यांग बच्चों का परीक्षण प्रस्तावित था।

इसके साथ ही सूत्रों ने बताया कि कक्षा 01 से कक्षा 12 तक के दिव्यांग विद्यार्थियों के परीक्षण के बाद उन्हें प्रमाण पत्र जारी किये जाने थे एवं जिनके प्रमाण पत्र की वैधता समाप्त हो रही थी उनके प्रमाण पत्रों का नवीनीकरण किया जाना था। इसके लिये तत्कालीन प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.आर.के. श्रीवास्तव के द्वारा विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी भी शिवरों में लगायी गयी थी।

सूत्रों ने बताया कि बरघाट में सबसे पहले शिविर का आयोजन किया जाना चाहिये था, किन्तु सीएमएचओ कार्यालय की लापरवाही के चलते इस शिविर में एक भी चिकित्सक उपस्थित नहीं होने की खबरें जैसे ही अखबारों में प्रकाशित हुई वैसे ही आनन फानन में सीएमएचओ कार्यालय के द्वारा शिविर की तिथि के दो दिन बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों को बरघाट पहुँचने के आदेश प्रदाय किये गये।

इसी तरह सूत्रों ने बताया कि बरघाट में आयोजित शिविर को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद शेष विकास खण्डों में शिविरों का आयोजन हो चुका है और दिव्यांग या विशेष जरूरत वाले बच्चों का परीक्षण किया जाकर उन्हें प्रमाण पत्र भी प्रदाय कर दिये गये हैं। यहाँ यक्ष प्रश्न यही खड़ा हुआ है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुपस्थिति में आखिर किन चिकित्सकों के द्वारा इन विद्यार्थियों का परीक्षण किया गया? इन शिविरों में विशेषज्ञ विशेषकर बच्चा रोग विशेषज्ञ क्यों नहीं पहुँचे, यह पूछने की जहमत सीएमएचओ के द्वारा नहीं उठायी गयी।

सूत्रों ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इन शिविरों में पहली से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया जाना था। इस लिहाज से हर शिविर में एक बच्चा रोग विशेषज्ञ का होना आवश्यक था, किन्तु एक भी शिविर में कोई भी बच्चा रोग विशेषज्ञ नहीं पहुँचा था।

इसके साथ ही सूत्रों ने आगे बताया कि जिले में आठ बच्चा रोग विशेषज्ञ चिकित्सक पदस्थ होने के बाद एक भी बच्चा रोग विशेषज्ञ का शिविर में न पहुँचना अपने आप में एक बहुत बड़ी विसंगति है। इसके बाद भी तत्कालीन प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव के द्वारा इस मामले में संज्ञान नहीं लिया गया, जिससे इस तरह के शिविरों में व्यापक स्तर पर फर्जीवाड़े की बू आ रही है। कहा जा रहा है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों के बिना परीक्षण के जारी किये गये इस तरह के प्रमाण पत्रों की वैधानिकता ही नहीं रह जाती है।

(क्रमशः जारी)



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